भारत का पड़ोसी देशों को ऊर्जा सहायता: संकट में सहयोग
ऊर्जा संकट का वैश्विक प्रभाव
दुनिया भर में ऊर्जा संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। यूरोप से लेकर अफ्रीका और एशिया के देशों तक, सभी इस समस्या से जूझ रहे हैं। इसका मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष है, जिसने स्टेट ऑफ हार्मोंस को प्रभावित किया है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर नकारात्मक असर डाला है। ऐसे में, क्या भारत अपने पड़ोसी देशों को संकट में छोड़ देगा? भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ऐसा नहीं होगा।
भारत की ऊर्जा सहायता
भारत ने भूटान, नेपाल, श्रीलंका और मॉरिशस जैसे देशों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कई पड़ोसी देशों ने भारत से ऊर्जा सामग्री की मांग की है, और भारत उनकी आवश्यकताओं को पूरा कर रहा है। उदाहरण के लिए, मार्च में भारत ने बांग्लादेश को 22,000 मेट्रिक टन हाई स्पीड डीजल प्रदान किया था, और इस महीने भी उन्हें ऊर्जा सामग्री दी जा रही है।
श्रीलंका और मॉरिशस के साथ सहयोग
श्रीलंका को पिछले महीने 38,000 मेट्रिक टन पेट्रोलियम उत्पाद भेजे गए थे। हाल ही में, भारत के विदेश मंत्री ने मॉरिशस का दौरा किया, जहां दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग पर चर्चा हुई। दोनों सरकारों के बीच एक समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है, ताकि मॉरिशस की ऊर्जा स्थिति को बेहतर बनाया जा सके।
नेपाल और भूटान के साथ संबंध
नेपाल के साथ पहले से ही भारतीय ऑयल कॉरपोरेशन के माध्यम से पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति का समझौता है। यह आपूर्ति बिना किसी रुकावट के की जा रही है। भूटान के साथ भी ऊर्जा सहयोग की एक मजबूत साझेदारी है।
अन्य पड़ोसी देशों के साथ बातचीत
मालदीव और सेशेल्स से भी ऊर्जा सामग्री की मांग की गई है, और इस पर बातचीत जारी है। पड़ोसी देशों की सरकारों ने भारत की इस सहायता की सराहना की है, खासकर जब पश्चिम एशिया में संघर्ष चल रहा है।
