बिहार में शराब तस्करी का नया तरीका: तरबूज में छिपाकर भेजी जा रही शराब
बिहार में शराब तस्करी की चुनौती
छपरा: बिहार में जहां शराबबंदी लागू है, वहीं शराब की तस्करी पुलिस के लिए एक गंभीर समस्या बन गई है। तस्कर अब शराब की तस्करी के लिए नए-नए तरीके अपनाने लगे हैं। एंबुलेंस और तेल के टैंकरों के बाद, अब तरबूज और कागजात रखने वाली फाइलों में शराब छिपाई जा रही है। हालांकि, पुलिस की सतर्कता ने उनके इन प्रयासों को विफल कर दिया है। हाल ही में छपरा में तरबूज के अंदर छिपाकर शराब की तस्करी का मामला सामने आया है।
तरबूज का इस्तेमाल शराब तस्करी में
सूत्रों के अनुसार, तस्कर तरबूज के अंदर शराब छिपाकर उसे सप्लाई कर रहे थे, ताकि पुलिस की नजर से बचा जा सके। इसके अलावा, नमक की बोरियों के बीच भी इस खेप को छिपाया जा रहा था, जिससे किसी को संदेह न हो। सोनपुर स्टेशन पर पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई की और एक आरोपी को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान सचिन कुमार के रूप में हुई है, जो वैशाली जिले के महुआ का निवासी है। पुलिस अब इस तस्करी के नेटवर्क की जांच कर रही है।
आरजेडी का आरोप
आरजेडी के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने बिहार में शराबबंदी कानून को विफल बताते हुए सरकार पर हमला किया। उन्होंने कहा कि शासन और शराब माफिया के बीच कथित गठजोड़ के कारण यह कानून 'राज्य का सबसे बड़ा संस्थागत भ्रष्टाचार' बन गया है। उन्होंने दावा किया कि शराबबंदी के बाद राज्य में 11 लाख मामले दर्ज किए गए और 16 लाख से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
शराब की जब्ती के आंकड़े
तेजस्वी यादव ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में दो करोड़ लीटर से अधिक शराब जब्त की गई है, जो प्रतिदिन औसतन 11 हजार लीटर से अधिक है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2026 में औसतन तीन लाख 70 हजार 684 लीटर अवैध शराब प्रति माह बरामद की गई, जो प्रतिदिन करीब 12,356 लीटर होती है। आरजेडी नेता ने आरोप लगाया कि ये केवल जब्त शराब के आंकड़े हैं, जबकि वास्तविकता में राज्य में प्रतिदिन शराब की खपत इससे कहीं अधिक है।
