बस्ती में दोस्ती का खौफनाक अंत: उधारी के लिए हत्या का खुलासा
बस्ती में हत्या का सनसनीखेज मामला
Basti News: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में एक युवक की हत्या के मामले में पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। यह हत्या मृतक के दोस्तों द्वारा की गई थी। दरअसल, जब एक दोस्त ने पार्टी के बाद पैसे लौटाने में आनाकानी की, तो उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस हत्याकांड का विस्तृत खुलासा किया है। किराना व्यापारी मनोज मणि त्रिपाठी की हत्या ने दोस्ती के रिश्ते को तार-तार कर दिया है। यह केवल एक हत्या का मामला नहीं है, बल्कि एक ऐसी साजिश है जिसे उन लोगों ने अंजाम दिया, जिनके साथ मृतक ने कई साल बिताए थे.
पुलिस के अनुसार, कुछ रुपयों के उधारी के विवाद ने दोस्तों को हैवान बना दिया। जांच में यह खुलासा हुआ कि आरोपियों शिवम और ऋषभ ने मनोज की हत्या की योजना पहले से बना ली थी। जब उधारी मांगने पर उनका धैर्य टूट गया, तो उन्होंने हत्या करने का निर्णय लिया। इसके लिए उन्होंने बाजार से एक धारदार चाकू खरीदा।
पार्टी के बहाने हत्या का अंजाम
2 मई की रात, आरोपियों ने मनोज को पार्टी के बहाने बुलाया। करचोलिया फार्म के पास, तीनों दोस्त शराब पीने लगे। जैसे ही मनोज नशे में धुत हुआ, आरोपियों ने उस पर हमला कर दिया। उन्होंने उसकी गर्दन पर वार किए ताकि वह बच न सके। कुछ ही क्षणों में मनोज का शरीर ठंडा पड़ गया और उसके 'दोस्त' उसे लहूलुहान छोड़कर भाग गए.
शुरुआत में यह मामला ब्लाइंड मर्डर था, लेकिन एएसपी श्यामाकांत के नेतृत्व में पुलिस ने जब जांच शुरू की, तो सच्चाई सामने आने लगी। पुलिस ने क्षेत्र के कई सीसीटीवी फुटेज की जांच की, जिसमें आरोपी वारदात से पहले शराब और हथियार खरीदते हुए दिखाई दिए।
हत्या से पहले नशा कराया गया
मनोज के शरीर में शराब की पुष्टि ने यह साबित कर दिया कि हत्या से पहले उसे नशा कराया गया था। पत्नी कुमकुम के संदेह और पुलिस की घेराबंदी ने शिवम और ऋषभ को टूटने पर मजबूर कर दिया। गिरफ्त में आते ही दोनों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। एडिशनल एसपी श्यामाकांत ने बताया कि पुलिस ने 48 घंटे के भीतर इस मामले का खुलासा कर दिया। हत्या का कारण लेन-देन था और दोनों आरोपी अब पुलिस की गिरफ्त में हैं।
परिवार पर दुखों का पहाड़
इस हत्याकांड ने मस्जिदिया गांव के एक परिवार का चिराग बुझा दिया है। 36 वर्षीय मनोज अपने परिवार का एकमात्र सहारा थे। उनके 16 वर्षीय बेटे शानू और 15 वर्षीय बेटी खुशी की आंखों के आंसू नहीं सूख रहे हैं। पत्नी कुमकुम का रो-रोकर बुरा हाल है, जिसे 2 मई की रात अपने पति के लौटने की उम्मीद थी। जब पैसा और नशा इंसान के विवेक पर हावी हो जाता है, तो वह अपने और पराए का फर्क भूल जाता है। कप्तानगंज की यह घटना इसी मानसिक पतन का परिणाम है। पुलिस ने महज 48 घंटों में मामले का खुलासा कर आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है.
