पूर्णिमा व्रत 2026: सही तिथि और विधि जानें
पूर्णिमा व्रत 2026 का महत्व
पूर्णिमा हर महीने आती है, लेकिन कार्तिक, वैशाख और माघ की पूर्णिमा विशेष रूप से शुभ मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु, भोलेनाथ और चंद्र देव की पूजा की जाती है। कई परिवारों में इस अवसर पर भगवान सत्यनारायण की कथा का आयोजन भी किया जाता है। भविष्य पुराण के अनुसार, पूर्णिमा तिथि पर तीर्थ स्थान पर स्नान करने का विशेष महत्व है, जिससे सभी पापों का नाश होता है। यदि तीर्थ स्थल पर जाना संभव न हो, तो घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी पुण्यदायक माना जाता है। आइए जानते हैं कि पूर्णिमा व्रत कब मनाया जाएगा।
पूर्णिमा व्रत की तिथि
पूर्णिमा तिथि 30 अप्रैल की रात 9:12 बजे से शुरू होकर 1 मई की रात 10:52 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, यह व्रत 1 मई 2026 को रखा जाएगा।
पूर्णिमा पर चंद्रोदय का समय
पूर्णिमा के दिन चंद्रमा निकलने का समय शाम 6:52 बजे है।
पूर्णिमा व्रत की विधि
- पूर्णिमा तिथि पर सूर्योदय से पहले स्नान करना चाहिए, जिसमें गंगाजल मिलाना न भूलें।
- इसके बाद भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा करें।
- कई श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं, जबकि कुछ शाम की पूजा के बाद बिना नमक का सात्विक भोजन करते हैं।
- यह उपवास सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक होता है। शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है।
- शाम में पूर्णिमा की कथा सुनना भी आवश्यक है।
- इस व्रत को रखने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
पूर्णिमा व्रत का पारण
पूर्णिमा व्रत का पारण आमतौर पर लोग शाम को चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करने के बाद करते हैं। पारण से पहले ब्राह्मण को यथाशक्ति दान देना चाहिए।
