पाकिस्तान में जज का तबादला: प्रधानमंत्री को तलब करने की बात बनी कारण
इस्लामाबाद हाईकोर्ट के जज का विवादास्पद तबादला
पाकिस्तान की इस्लामाबाद हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश को उनके द्वारा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को तलब करने की बात कहने के कारण पद से हटा दिया गया है। न्यायाधीश का नाम मोहसिन अख्तर कयानी है, और इस निर्णय ने पाकिस्तान के राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा पैदा कर दी है। हालांकि, सरकार का कानून विभाग इसे एक सामान्य स्थानांतरण बताता है।
सुनवाई के दौरान उठे सवाल
डॉन समाचार पत्र के अनुसार, इस्लामाबाद हाईकोर्ट में मंगलवार को पाकिस्तान टेलीकम्युनिकेशन अथॉरिटी में वित्तीय सदस्यों की नियुक्ति पर सुनवाई चल रही थी। इस दौरान, जज कयानी ने सरकार के वकील से कहा कि यदि 18 मई तक मामला न सुलझा, तो वह प्रधानमंत्री को तलब करेंगे। उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए, यह कहते हुए कि मामला लंबे समय से लटका हुआ है।
तबादले की प्रक्रिया
रिपोर्टों के अनुसार, सुनवाई समाप्त होने के एक घंटे बाद जज कयानी को इस्लामाबाद हाईकोर्ट से हटा दिया गया और उन्हें लाहौर हाईकोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया। दिलचस्प बात यह है कि ज्यूडिशियल कमीशन के कई सदस्यों ने इस ट्रांसफर पर असहमति जताई, लेकिन बहुमत से प्रस्ताव पारित कर उन्हें हटा दिया गया।
अन्य जजों का भी तबादला
पाकिस्तान सरकार ने बताया कि जज कयानी के अलावा जस्टिस बाबर सत्तार को भी लाहौर से पेशावर हाईकोर्ट भेजा गया है। इसके अतिरिक्त, जस्टिस रफत इम्तियाज को सिंध हाईकोर्ट में तैनात किया गया है। इस बीच, कयानी की जगह पर अभी तक किसी अन्य जज की नियुक्ति नहीं की गई है।
ज्यूडिशरी पर आरोप
पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने पाकिस्तान की न्यायपालिका को सरकार का खिलौना बताया है। उनका कहना है कि जज न्याय नहीं कर पा रहे हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने हाल ही में एक रिपोर्ट में कहा था कि पाकिस्तान की सरकार और सेना ने न्यायपालिका पर नियंत्रण के लिए संविधान में 27वां संशोधन किया है, जिससे सरकार को जजों के तबादले और हटाने का अधिकार मिल गया है।
