दिल्ली सरकार की राजस्व में वृद्धि: नॉनजीएसटी से मिली बड़ी सफलता
दिल्ली सरकार के लिए उत्साहजनक वित्तीय आंकड़े
दिल्ली सरकार के खजाने के लिए पिछले वर्ष की तुलना में एक सकारात्मक खबर आई है। आमतौर पर किसी राज्य की आय का मुख्य स्रोत जीएसटी होता है, लेकिन इस बार दिल्ली सरकार ने नॉनजीएसटी राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि की है। अधिकारियों द्वारा रविवार को साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्टांप ड्यूटी, एक्साइज और वाहन पंजीकरण शुल्क से होने वाली आय ने संशोधित लक्ष्यों को पार कर लिया है।
राजस्व में वृद्धि के कारण
अधिकारियों ने बताया कि पिछले एक साल में अपनाई गई लक्षित रणनीतियों और स्पष्ट नीतिगत दिशानिर्देशों के कारण राजस्व में यह वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बजट में स्टांप ड्यूटी के लिए ₹9,000 करोड़, एक्साइज के लिए ₹7,000 करोड़ और वाहन पंजीकरण के लिए ₹3,700 करोड़ का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि, बाद में संशोधित अनुमानों में एक्साइज और वाहन टैक्स के लक्ष्यों को थोड़ा कम किया गया, लेकिन वास्तविक वसूली इन संशोधित लक्ष्यों से भी अधिक रही।
राजस्व में योगदान देने वाले प्रमुख विभाग
राजस्व के मोर्चे पर तीन विभागों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है:
- स्टांप ड्यूटी: इस मद में सरकार ने ₹9,119.72 करोड़ की वसूली की, जो कि संशोधित लक्ष्य का 101 प्रतिशत है।
- एक्साइज टैक्स: मार्च तक आबकारी शुल्क से होने वाली कमाई ₹6,206 करोड़ रही, जो कि संशोधित लक्ष्य का 103 प्रतिशत है।
- वाहन पंजीकरण शुल्क: वाहनों पर लगने वाले टैक्स से सरकार को ₹3,245 करोड़ मिले, जो कि संशोधित लक्ष्य का 101 प्रतिशत है।
जीएसटी और वैट का प्रदर्शन
जहां नॉनजीएसटी राजस्व में वृद्धि देखी गई, वहीं जीएसटी और वैट के आंकड़े अपेक्षा से थोड़े कम रहे। दिल्ली सरकार का वास्तविक जीएसटी संग्रह ₹36,629.54 करोड़ रहा, जबकि संशोधित लक्ष्य ₹40,000 करोड़ का था। वैट संग्रह ₹7,148.52 करोड़ रहा, जो कि ₹7,500 करोड़ के लक्ष्य से थोड़ा कम है।
भविष्य के लिए लक्ष्य
इस शानदार प्रदर्शन से उत्साहित होकर दिल्ली सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपने लक्ष्यों को और ऊंचा कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, नए बजट में स्टांप ड्यूटी से ₹11,000 करोड़, एक्साइज से ₹7,200 करोड़ और वाहन टैक्स से ₹3,800 करोड़ की कमाई का लक्ष्य रखा गया है।
