चीन के प्रति ट्रंप प्रशासन की नई कूटनीतिक दिशा
ट्रंप प्रशासन ने चीन के प्रति अपने दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जो पिछले सख्त रुख से एक नरम और सुलह वाले लहजे की ओर बढ़ रहा है। यह बदलाव न केवल अमेरिका की रक्षा रणनीति में दिखता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि ट्रंप अब चीन के साथ एक नई कूटनीतिक दिशा की ओर बढ़ रहे हैं। जानें कि यह बदलाव क्यों हो रहा है और इसके पीछे के कारण क्या हैं।
| Apr 10, 2026, 16:55 IST
चीन के प्रति बदलते रुख का खुलासा
पेंटागन और व्हाइट हाउस के बीच चीन के मुद्दे पर मतभेद अब स्पष्ट हो गए हैं। पिछले वर्ष, जब सैन्य अधिकारियों ने राष्ट्रपति ट्रंप को रक्षा रणनीति का एक प्रारूप प्रस्तुत किया, जिसमें चीन को अमेरिका के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया गया, तो ट्रंप ने न केवल असहमति जताई, बल्कि इसे पूरी तरह से बदलने का निर्देश भी दिया। जनवरी में जारी संशोधित 'नेशनल डिफेंस स्ट्रैटेजी' में इस बदलाव का प्रभाव स्पष्ट है, जहां दशकों पुरानी सख्त नीति को छोड़कर बीजिंग के प्रति एक नरम दृष्टिकोण अपनाया गया है। यह बदलाव दर्शाता है कि ट्रंप प्रशासन अब चीन के साथ पुरानी दुश्मनी के बजाय एक नई कूटनीतिक दिशा की ओर बढ़ रहा है।
नीतियों में बदलाव के संकेत
अक्टूबर में दक्षिण कोरिया के बुसान में शी जिनपिंग से मुलाकात के बाद ट्रंप प्रशासन ने बीजिंग के प्रति कई महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव किए हैं। अमेरिका ने न केवल चीनी उद्योगों पर भारी टैरिफ को रोक दिया है, बल्कि सुरक्षा के लिए खतरा मानी जाने वाली चीनी कंपनियों पर कार्रवाई से भी पीछे हट गया है। इसके अलावा, चीनी हैकर्स की जांच में भी कमी आई है और अमेरिका में चीनी निवेश को बिना किसी सख्ती के अनुमति दी जा रही है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे चीन के खिलाफ अपने बयानों में नरमी लाएं, जो वाशिंगटन की दशकों पुरानी विदेश नीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है।
ट्रंप का चीन के प्रति नरम रुख
ट्रंप ने चीन के प्रति अपने दृष्टिकोण में कई बार बदलाव किया है। कभी वह जियो-पॉलिटिकल या आर्थिक चिंताओं की बात करते हैं, तो कभी शी जिनपिंग के साथ डील करने की। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने चीन के साथ सावधानी से व्यवहार किया है। इसका एक मुख्य कारण दुर्लभ खनिजों और इलेक्ट्रिक वाहनों में उपयोग होने वाले महत्वपूर्ण घटकों पर बीजिंग का प्रभुत्व है। ऐसे में, चीन के खिलाफ कठोर टैरिफ रणनीति अपनाना एक जोखिम भरा विकल्प बन गया है।
नई कूटनीतिक दिशा की ओर कदम
राष्ट्रपति के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत वैश्विक व्यापार और सुरक्षा व्यवस्था को एकतरफा रूप से बदलने के प्रयास से हुई। ट्रंप के कई प्रयासों के अप्रत्याशित परिणाम निकले हैं। विशेष रूप से, उन्हें उम्मीद थी कि चीनी वस्तुओं का प्रभावी बहिष्कार बीजिंग को अमेरिका के लिए अधिक अनुकूल व्यापार शर्तों को स्वीकार करने के लिए मजबूर करेगा। इसके विपरीत, चीन ने दुर्लभ खनिजों पर प्रतिबंध लगा दिए, जिससे ट्रंप को पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा।
ट्रंप की चीन नीति पर हैरानी
अमेरिकी प्रशासन के भीतर चीन को घेरने की हर कोशिश अब ठप होती नजर आ रही है। वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने कड़ा फरमान जारी किया है कि चीन से जुड़े किसी भी एक्शन के लिए उनकी लिखित मंजूरी अनिवार्य होगी। स्थिति इतनी अजीब हो गई है कि अधिकारियों को रिपोर्ट की भाषा तक बदलनी पड़ी है। ट्रंप ने अपने 'स्टेट ऑफ द यूनियन' भाषण में अपने इस प्रतिद्वंद्वी का नाम तक नहीं लिया। ट्रंप प्रशासन के इस यू-टर्न से सुरक्षा सलाहकार और चीन के प्रति सख्त रुख रखने वाले अधिकारी गहरे सदमे में हैं।
