गर्मियों में आम पकाने के देसी तरीके

गर्मियों में आम का सेवन बढ़ जाता है, लेकिन बाजार में केमिकल से पके आम सेहत के लिए हानिकारक हो सकते हैं। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि पुराने समय में आम को कैसे पकाया जाता था। जानें पुआल, गेहूं, चावल, जूट की बोरियों और मिट्टी के बर्तनों का उपयोग करके आम को पकाने के देसी तरीके। ये विधियाँ न केवल प्रभावी थीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी सुरक्षित थीं।
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गर्मियों में आम का महत्व

गर्मियों के मौसम में आम, जिसे फलों का राजा कहा जाता है, का सेवन बड़े चाव से किया जाता है। मई का महीना आते ही बाजार में आम की भरपूर उपलब्धता हो जाती है। लोग आम का उपयोग विभिन्न प्रकार से करते हैं, जैसे शेक, स्मूदी, लस्सी, आइसक्रीम और आम पन्ना। हालांकि, वर्तमान में लोग बाजार से फल खरीदने में हिचकिचा रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि आम को पकाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पहले आम को कैसे पकाया जाता था? पुराने समय में आम पकाने के लिए प्राकृतिक और देसी तरीके अपनाए जाते थे। आइए जानते हैं उन तरीकों के बारे में।


1. पुआल या सूखी घास का उपयोग

पुराने समय में आम को पकाने के लिए पुआल या सूखी घास का उपयोग एक प्रभावी तरीका माना जाता था। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में इसी विधि का पालन किया जाता है। आमों को एक बड़े लकड़ी के बक्से या कमरे के कोने में सूखी घास की मोटी परत पर रखा जाता था और फिर उन्हें फिर से घास से ढक दिया जाता था। इस प्रक्रिया से आमों में गर्मी उत्पन्न होती है और प्राकृतिक एथिलीन गैस बाहर नहीं निकल पाती, जिससे आम धीरे-धीरे और समान रूप से पक जाते हैं।


2. गेहूं या चावल में दबाना

गांवों में आम पकाने के लिए गेहूं या चावल के ड्रम में कच्चे आमों को दबाने की विधि का उपयोग किया जाता है। अनाज के अंदर का तापमान सामान्य और गर्म रहता है, जिससे आम 2 दिनों में पक जाते हैं।


3. जूट की बोरियों का उपयोग

यदि आमों की मात्रा कम होती थी, तो जूट की बोरियों का सहारा लिया जाता था। आमों को पहले अखबार में लपेटा जाता था और फिर जूट की बोरी में भरकर कसकर बांध दिया जाता था। बोरी को गर्म स्थान पर रखने से आम प्राकृतिक रूप से पक जाते थे।


4. मिट्टी के बर्तन

कई बार आमों को मिट्टी के बड़े बर्तनों में भरकर उनके ऊपर सूती कपड़ा बांध दिया जाता था। मिट्टी के बर्तन नमी को सोख लेते थे और अंदर की गर्मी आम को पकाने में मदद करती थी। यह तरीका भी काफी प्रभावी माना जाता था।