खाड़ी देशों में होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ता तनाव
खाड़ी देशों का संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव
होर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे पर तनाव बढ़ता जा रहा है। खाड़ी देशों ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को सुरक्षित रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का दरवाजा खटखटाया है। बहरीन के नेतृत्व में प्रस्तुत इस प्रस्ताव में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि आवश्यक हुआ, तो सैन्य कार्रवाई की अनुमति दी जाए।
बड़ी शक्तियों का विरोध
जैसे ही यह प्रस्ताव मतदान की ओर बढ़ा, रूस, चीन और फ्रांस जैसे स्थायी सदस्यों ने इसके उस हिस्से पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें सैन्य बल के उपयोग की बात की गई थी। इन देशों का मानना है कि इस तरह की भाषा टकराव को बढ़ा सकती है और क्षेत्र को बड़े युद्ध की ओर धकेल सकती है। इस विरोध के कारण प्रस्ताव फिलहाल अटक गया है।
ईरान के साथ बढ़ता तनाव
यह विवाद तब शुरू हुआ जब 28 फरवरी 2026 को ईरान ने अमेरिका और इजराइल के साथ बढ़ते संघर्ष के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया। यह समुद्री मार्ग विश्व के लगभग 20% तेल और गैस का परिवहन करता है। इसके बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
खाड़ी देशों की चिंताएं
खाड़ी देशों का तर्क है कि यह केवल क्षेत्रीय समस्या नहीं है, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ा मामला है। इसलिए बहरीन और उसके सहयोगियों ने बहुराष्ट्रीय नौसैनिक बलों को इस मार्ग की सुरक्षा के लिए कार्रवाई की अनुमति देने की मांग की है। दूसरी ओर, फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रोन का मानना है कि सैन्य विकल्प अवास्तविक है।
सुरक्षा परिषद में मतभेद
इस घटनाक्रम ने सुरक्षा परिषद के भीतर गहरे मतभेदों को उजागर किया है। केवल स्थायी सदस्य ही नहीं, बल्कि अस्थायी सदस्य देशों के बीच भी इस मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई है। खाड़ी देशों का गुस्सा भी खुलकर सामने आ रहा है।
आर्थिक और मानवीय प्रभाव
इस संकट का प्रभाव केवल राजनीतिक नहीं है, बल्कि कतर जैसे देशों को अपने ऊर्जा उत्पादन में कटौती करनी पड़ी है, जिससे अरबों डॉलर का नुकसान हो रहा है। आम नागरिक भी इस स्थिति की कीमत चुका रहे हैं।
भारत की स्थिति
जहां पहले इस मार्ग से 100 से 150 जहाज प्रतिदिन गुजरते थे, अब यह संख्या घटकर केवल 5 से 7 जहाजों तक रह गई है। भारत के दृष्टिकोण से, कई भारतीय जहाज इस समय होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर चुके हैं।
