कूर्म जयंती 2026: महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

कूर्म जयंती, जो इस वर्ष 1 मई 2026 को मनाई जाएगी, हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है। इस दिन भगवान विष्णु के कूर्म अवतार की पूजा की जाती है, जो जीवन की समस्याओं को दूर करने और इच्छाओं को पूरा करने में सहायक मानी जाती है। जानें इस पर्व का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि, जिससे आप इस दिन को सही तरीके से मना सकें।
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कूर्म जयंती का महत्व

हिंदू धर्म में वैशाख पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस दिन बुद्ध पूर्णिमा के साथ-साथ कूर्म जयंती भी मनाई जाती है, जो इस वर्ष 1 मई 2026 को होगी। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान विष्णु के प्रमुख अवतारों में से एक कूर्म अवतार का विशेष स्थान है।


कूर्म जयंती का आध्यात्मिक महत्व

सनातन धर्म में कूर्म जयंती का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व अत्यधिक है। इस दिन भगवान विष्णु के इस अवतार की विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन की सभी समस्याएं दूर होती हैं और इच्छाएं पूरी होती हैं। यह पूजा मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है।


कूर्म जयंती के शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, वैशाख पूर्णिमा की शुरुआत 30 अप्रैल 2026 को रात 9:12 बजे होगी और इसका समापन 1 मई 2026 को रात 10:52 बजे होगा। इस प्रकार, कूर्म जयंती 1 मई को मनाई जाएगी।


कूर्म जयंती की पूजा विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • घर के मंदिर को साफ करें और गंगाजल छिड़कें।
  • एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की तस्वीर स्थापित करें।
  • भगवान कूर्म को तिलक करें और दीपक जलाएं।
  • विष्णु जी को अबीर, गुलाल, फूल, चावल आदि अर्पित करें।
  • विष्णु जी के मंत्रों का जाप करें और पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं।
  • अंत में विष्णु जी की आरती करें और पूजा में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगें।


कछुए से मानव जीवन की शुरुआत

कई ग्रंथों में यह उल्लेखित है कि कछुए से मानव जीवन की शुरुआत हुई। यह अवतार यह दर्शाता है कि सृष्टि और जीवन का विकास जल से संबंधित है। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के चारों लक्ष्यों का संतुलन ही पूर्ण जीवन का आधार है।


कूर्म अवतार का गूढ़ रहस्य

भगवान विष्णु का कूर्म अवतार धैर्य, दृढ़ता और स्थिरता का गहरा आध्यात्मिक संदेश देता है। जैसे एक कछुआ अपने बोझ को धैर्यपूर्वक उठाता है, उसी प्रकार यह अवतार सिखाता है कि सच्ची शक्ति स्थिरता और अटूट विश्वास में निहित है।