ईरान में सीजफायर: अमेरिकी सेना की जीत या हार?
डोनाल्ड ट्रंप का दावा और अमेरिकी सेना की स्थिति
ईरान में सीजफायर की घोषणा को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके सहयोगी एक महत्वपूर्ण जीत के रूप में देख रहे हैं। इस संदर्भ में सोशल मीडिया पर कई पोस्ट और वीडियो साझा किए जा रहे हैं। रक्षा मंत्री ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रपति ट्रंप की प्रशंसा की, जबकि अमेरिकी सेना इस जीत को लेकर सतर्कता बरत रही है। उनका मानना है कि इस मुद्दे पर कोई भी गलतफहमी नहीं होनी चाहिए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी सेना का रुख
वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार, अमेरिका के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ डेन केन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जीत के बारे में पूछे गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। वहीं, हेगसेथ ने ट्रंप की प्रशंसा करते हुए पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में समय बिताया।
अमेरिकी सेना की हार के कारण
1. ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका के 13 सैनिकों की जान गई है, जबकि 12 गंभीर रूप से घायल हुए हैं। सेना का मुख्य उद्देश्य हासिल नहीं हो सका, न ही ईरान में तख्तापलट हुआ। इसके विपरीत, अमेरिकी सेना पर लड़कियों के स्कूलों पर हमले का आरोप लगा है, जो युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है.
2. खाड़ी में अमेरिकी सेना के सभी बेस बर्बाद हो चुके हैं। ईरान ने कई अमेरिकी जहाजों को नष्ट कर दिया। अमेरिकी एयरफोर्स ने 12,000 मिसाइलों से ईरान पर हमला किया, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं मिला। जब ट्रंप ने सैनिकों से होर्मुज पर नियंत्रण की बात की, तो सैनिक पीछे हट गए।
3. इस युद्ध में अमेरिकी सैनिकों द्वारा हमले पर 40 अरब डॉलर खर्च किए गए हैं, जो कुल रक्षा बजट का 5 प्रतिशत है। 2025 में अमेरिका का रक्षा बजट 849 अरब डॉलर था।
4. ट्रंप सीजफायर को लेकर भ्रमित हैं और यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि उन्हें समझौता करना चाहिए या युद्ध जारी रखना चाहिए। इस कारण सेना जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाना चाहती।
ट्रंप के चार मुख्य उद्देश्य
ट्रंप ने ईरान पर हमले के समय चार मुख्य उद्देश्यों की घोषणा की थी। पहला उद्देश्य ईरान को कमजोर करना था ताकि वह भविष्य में परमाणु हथियार न बना सके। दूसरा उद्देश्य सत्ता परिवर्तन था, तीसरा उद्देश्य उसके मिसाइलों को समाप्त करना था, और चौथा उद्देश्य उसके तेल ठिकानों पर नियंत्रण करना था।
हालांकि, 38 दिन बाद भी अमेरिका को इनमें से कोई भी उद्देश्य हासिल नहीं हुआ है। सैन्य हमले के बावजूद, ईरान की जनता अमेरिका के समर्थन में सड़कों पर नहीं उतरी।
