ईरान पर इजरायल के हमले का भारत पर संभावित प्रभाव
ईरान पर इजरायल का हमला: एक नई शुरुआत
ईरान पर इजरायल के हमले के साथ ही मध्य पूर्व में एक बड़े युद्ध की शुरुआत हो गई है। इजरायली मिसाइलों ने तेहरान के 30 से अधिक स्थानों को निशाना बनाया, जिसमें राष्ट्रपति का निवास, सरकारी कार्यालय, और एयरपोर्ट शामिल हैं। इस हमले के बाद ईरान में स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए हैं, और बिजली, फोन, और इंटरनेट सेवाएं भी ठप हो गई हैं। तेहरान में पूरी तरह से अंधेरा छा गया है और ईरान का एयर स्पेस भी बंद कर दिया गया है। यह संघर्ष भारत तक भी अपनी आंच पहुंचा सकता है।
ईरान के तेल उद्योग पर प्रभाव
ईरान के पास 158 बिलियन बैरल कच्चा तेल है, और वह मध्य पूर्व का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है। हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण वह अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पा रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में, ईरान का तेल निर्यात औसतन 1.5 से 1.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहा। ईरान के प्रमुख खरीदारों में भारत, चीन, और अमेरिका शामिल हैं। चीन ईरान का सबसे बड़ा तेल आयातक है, जो रोजाना 18 लाख बैरल तेल खरीदता है।
भारत में संभावित तेल संकट
ईरान पर इजरायल के हमले के बाद भारत को तेल संकट का सामना करना पड़ सकता है। भारत भले ही ईरानी तेल का विकल्प खोज ले, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य का विकल्प नहीं खोज सकता। यह जलडमरूमध्य दुनिया के 20 प्रतिशत कच्चे तेल के आयात-निर्यात का मार्ग है। यदि युद्ध के कारण यह रास्ता बंद होता है, तो भारत को गंभीर तेल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
तेल की कीमतों में वृद्धि की संभावना
यदि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होता है, तो भारत को तेल की कीमतों में वृद्धि का सामना करना पड़ सकता है। ब्रोकरेज फर्म Equirus Securities के अनुसार, ईरान पर हमले के कारण यदि तेल की सप्लाई रुकती है, तो कच्चे तेल की कीमत 95 से 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। इसके अलावा, अन्य सेक्टर्स जैसे केमिकल्स और पेट्रोकेमिकल्स पर भी इसका असर पड़ेगा।
शेयर बाजार और सोने पर प्रभाव
ईरान पर हमले का असर केवल तेल तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक तनाव के कारण शेयर बाजार में भी गिरावट आ सकती है। निवेशक बाजार की अस्थिरता के कारण सोने में निवेश कर सकते हैं, जिससे सोने की कीमतें बढ़ सकती हैं। इस संघर्ष के कारण भारत में महंगाई का तूफान आ सकता है, जिससे रसोई से लेकर परिवहन तक के खर्चों में वृद्धि होगी।
