ईरान ने भारतीय जहाजों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही की दी अनुमति

ईरान ने भारतीय जहाजों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही की अनुमति दी है, जिससे तेल और गैस की आपूर्ति में सुधार की उम्मीद बढ़ गई है। ईरान के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि सुरक्षा मुद्दों के कारण मित्र देशों को इस मार्ग से गुजरने की पूरी स्वतंत्रता है। उन्होंने इजरायल और अमेरिका को वैश्विक ऊर्जा संकट के लिए जिम्मेदार ठहराया और पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका को खारिज किया। तनाव की शुरुआत अमेरिका और इजरायल के हमले से हुई थी, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर की मृत्यु हो गई थी।
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ईरान का सकारात्मक संदेश

नई दिल्ली: ईरान ने भारतीयों के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना साझा की है, जिससे तेल और गैस की आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों की आवाजाही में कोई बाधा नहीं होगी। भारत में ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि, डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने एक साक्षात्कार में कहा कि भारत के साथ उनके संबंध मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि कुछ भारतीय जहाज पहले ही इस मार्ग से सुरक्षित रूप से गुजर चुके हैं और भविष्य में भी यह प्रक्रिया जारी रहेगी। यह बयान उस समय आया है जब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और सुरक्षित समुद्री मार्गों को लेकर चिंता बढ़ रही है.


ईरान की सुरक्षा नीति

जब डॉ. इलाही से भारतीय जहाजों की आवाजाही के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने सकारात्मक उत्तर दिया। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा ईरान की अनुमति से नहीं, बल्कि सुरक्षा से संबंधित है। उनके अनुसार, ईरान पर हमले करने वाले देशों के लिए यह मार्ग बंद है, जबकि मित्र देशों के लिए यह पूरी तरह से खुला है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भारतीय जहाजों की निर्बाध आवाजाही भविष्य में भी बनी रहेगी.


ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर इजरायल और अमेरिका का प्रभाव

डॉ. इलाही ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल के लिए इजरायल और अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि मौजूदा संकट का मुख्य कारण युद्ध है। उनका मानना है कि यदि ईरान पर हमले बंद हो जाएं, तो युद्ध समाप्त हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि हमलावरों ने ईरान में नागरिकों की जानें ली हैं और ईरान अपनी रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है।


पाकिस्तान की भूमिका पर स्पष्टीकरण

पश्चिमी एशिया के संकट में पाकिस्तान की भूमिका पर डॉ. इलाही ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के माध्यम से ईरान और अमेरिका के बीच कोई बातचीत नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका केवल तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कुछ देशों का उपयोग करना चाहता है। पाकिस्तान इस मामले में कोई मध्यस्थता नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि सभी देशों को इस युद्ध को रोकने में सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए, लेकिन इसके लिए स्पष्ट नीयत होना आवश्यक है.


तनाव की शुरुआत

पश्चिमी एशिया में तनाव की शुरुआत 28 फरवरी को हुई, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त सैन्य हमले किए। इस हमले में ईरान के 86 वर्षीय सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद ईरान ने इजरायल और कई खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। अब सभी की नजरें सोमवार पर हैं, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दी गई डेडलाइन समाप्त हो रही है.