ईरान द्वारा होर्मुज जलमार्ग बंद करने के बाद ट्रंप की अपील

ईरान ने अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के जवाब में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन, फ्रांस, और अन्य देशों से मदद की अपील की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस मार्ग से केवल 1% तेल लेता है, जबकि यह कई देशों के लिए महत्वपूर्ण है। ट्रंप ने युद्धपोतों की तैनाती की योजना बनाई है, लेकिन अभी तक किसी भी देश ने ठोस कदम नहीं उठाया है। जानें इस स्थिति का क्या असर होगा और अन्य देशों की प्रतिक्रिया क्या है।
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ईरान का जलमार्ग बंद करने का निर्णय

ईरान द्वारा होर्मुज जलमार्ग बंद करने के बाद ट्रंप की अपील

ईरान ने अमेरिका और इजरायल की सैन्य गतिविधियों के जवाब में महत्वपूर्ण जलमार्ग, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, को बंद करने का निर्णय लिया है। इस स्थिति में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अन्य देशों से सहयोग की अपील की है। उन्होंने बताया कि अमेरिका इस मार्ग से केवल 1% तेल प्राप्त करता है, जबकि यह चीन और अन्य देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।


ट्रंप की अपील और योजना

ट्रंप ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन जैसे देश इस समस्या का समाधान करने के लिए अपने युद्धपोत भेजेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका ने ईरान की सैन्य क्षमता को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है, लेकिन ईरान के लिए ड्रोन भेजना और मिसाइल दागना आसान है।


अमेरिकी युद्धपोतों की भूमिका

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उनके युद्धपोत तट पर बमबारी करते रहेंगे और ईरानी जहाजों को निशाना बनाएंगे। उनका लक्ष्य है कि जल्द से जल्द होर्मुज जलमार्ग को फिर से खोला जाए। अमेरिका इस मार्ग को विश्व का सबसे महत्वपूर्ण तेल अवरोध मानता है।


अन्य देशों की प्रतिक्रिया

हालांकि, ट्रंप की अपील पर अभी तक किसी भी देश ने ठोस कदम नहीं उठाया है। ऑस्ट्रेलिया ने अपने युद्धपोत भेजने से इनकार कर दिया है। वहीं, जापान ने भी युद्धपोत तैनात करने की कोई योजना नहीं बनाई है।


दक्षिण कोरिया और चीन की स्थिति

दक्षिण कोरिया ने संकेत दिए हैं कि वे अमेरिका के साथ बातचीत कर रहे हैं, लेकिन कोई भी निर्णय गहन समीक्षा के बाद ही लिया जाएगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि यदि चीन सहयोग नहीं करता है, तो वह अपनी यात्रा को टाल सकते हैं।


यूरोपीय संघ की बैठक

इस बीच, यूरोपीय संघ के नेता एक महत्वपूर्ण बैठक करने जा रहे हैं, जिसमें मध्य पूर्व में नौसेना के छोटे मिशनों पर चर्चा की जाएगी। हालांकि, यह संभावना कम है कि वे बंद जलमार्ग को खोलने के लिए कोई ठोस निर्णय लेंगे।