ईरान और अमेरिका के बीच तनाव: होर्मुज जलडमरूमध्य पर टोल वसूली का मुद्दा

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच सीजफायर के बावजूद तनाव की स्थिति बनी हुई है, जिसका मुख्य कारण होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना है। ईरान ने जहाजों से टोल वसूली की है, लेकिन भारत के जहाजों से वसूली की पुष्टि नहीं हुई है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर बातचीत के अभाव की बात कही है। जानिए इस संकट की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
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सीजफायर के बाद की स्थिति

नई दिल्ली: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच सीजफायर के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना इस तनाव का मुख्य कारण बनता दिख रहा है। ईरान ने युद्ध को अपने लिए लाभ का साधन बना लिया है, जिससे अमेरिका की सुपर पावर स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से 20 लाख डॉलर तक की वसूली की है।


क्या भारत के जहाजों से भी वसूली की गई?

फारस की खाड़ी में युद्ध के कारण कई भारतीय जहाज और टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने में सफल रहे हैं। सवाल यह है कि क्या ईरान ने इन जहाजों से भी टोल वसूला है? ईरान ने टोल वसूली की बात की है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह भारत समेत अन्य देशों के लिए भी लागू है या नहीं।


भारत और ईरान के बीच बातचीत का अभाव

सीजफायर की घोषणा के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत और ईरान के बीच टोल के मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं हुई है।


ईरान का टोल वसूली का प्रयास

सीजफायर से पहले ही ईरान ने टोल वसूली की खबरें दी थीं और ओमान के साथ एक प्रोटोकॉल बनाने की पुष्टि की थी।


भारत के LPG टैंकरों की सुरक्षा

युद्ध के दौरान ईरान ने होर्मुज से सीमित संख्या में जहाजों को गुजरने की अनुमति दी है, जिसमें भारत के 8 LPG टैंकर भी शामिल हैं।


भारत का टोल भुगतान से इनकार

हालांकि, भारत ने स्पष्ट रूप से टोल भुगतान करने से इनकार किया है। विदेश मंत्रालय ने 9 अप्रैल, 2026 को प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि टोल के मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं हुई है।


फारस की खाड़ी की स्थिति

सीजफायर के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति सामान्य नहीं है। अमेरिका ने ईरान से जलडमरूमध्य खोलने की मांग की है, जबकि डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की आलोचना की है। इस समय, दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई बाधित है।