ईरान-अमेरिका वार्ता में तनाव: क्या ट्रंप ईरान की शर्तें मानेंगे?
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर से बढ़ता जा रहा है। अमेरिका जल्द से जल्द दूसरे दौर की शांति वार्ता की इच्छा रखता है, लेकिन ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी प्रकार की धमकी या दबाव के तहत बातचीत नहीं करेगा। ईरान के प्रमुख नेता और संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अमेरिका वार्ता को समर्पण की मेज में बदलना चाहता है, जिसका अर्थ है कि वह ईरान को झुकाने का प्रयास कर रहा है.
गालिबाफ की चेतावनी
गालिबाफ ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो ईरान युद्ध के मैदान में नए कदम उठाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब 22 अप्रैल को दो हफ्ते का सीजफायर समाप्त होने वाला है। इससे पहले, ट्रंप ने PBS न्यूज से बातचीत में कहा था कि यदि कोई समझौता नहीं हुआ, तो ईरान पर फिर से बम गिराए जाएंगे। इस बयान ने स्थिति को और भी तनावपूर्ण बना दिया है.
इस्लामाबाद में वार्ता का सस्पेंस
दोनों देशों के बीच अगली बातचीत पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाली है। ट्रंप ने कहा कि दोनों पक्षों ने बातचीत के लिए सहमति दी है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान इसमें भाग लेगा या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की टीम निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जाएगी, चाहे ईरान आए या नहीं। दूसरी ओर, ईरान के सरकारी मीडिया ने संकेत दिए हैं कि तेहरान इस बार की बातचीत में शामिल नहीं होगा, क्योंकि अमेरिका की मांगें बहुत अधिक हैं और उसका रुख बार-बार बदलता रहता है.
अरागची और इशाक डार की बातचीत
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार से फोन पर बातचीत की। उन्होंने कहा कि अमेरिका के उकसाने वाले कदम और बार-बार सीजफायर तोड़ने की घटनाएं बड़ी समस्या बन गई हैं। अरागची ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिकी कार्रवाई से ईरान के जहाजों को खतरा हो रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान सभी पहलुओं पर विचार करेगा और उसके बाद ही तय करेगा कि वार्ता में शामिल होना है या नहीं.
ईरान के राष्ट्रपति का बयान
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेशकियान ने भी कहा कि अमेरिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सफल बातचीत के लिए वादों का पालन करना आवश्यक है, लेकिन अमेरिका के हालिया बयान और कदम इसके विपरीत हैं। उनके अनुसार, अमेरिका ईरान पर दबाव डालकर उसे झुकाना चाहता है, लेकिन ईरान ऐसा नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका पर लंबे समय से भरोसा नहीं किया गया है और यह अविश्वास अब बहुत गहरा हो चुका है। अब यह देखना है कि अमेरिका वार्ता से पहले ईरान की शर्तें मानता है या नहीं.
