अमेरिकी वित्त मंत्री ने ट्रंप प्रशासन के तेल प्रतिबंधों पर दी जानकारी

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया है कि ट्रंप प्रशासन रूसी और ईरानी तेल पर दी गई प्रतिबंधों की छूट को आगे नहीं बढ़ाएगा। इस निर्णय से भारत को हाल के महीनों में हुए लाभ पर असर पड़ेगा, जहां भारतीय रिफाइनरियों ने बड़ी मात्रा में रूसी तेल का ऑर्डर दिया था। इसके अलावा, ईरान से कच्चे तेल की खेप भी भारत में पहुंची है। जानें इस महत्वपूर्ण निर्णय के पीछे की वजह और इसके संभावित प्रभाव।
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ट्रंप प्रशासन का नया निर्णय

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया है कि ट्रंप प्रशासन रूसी और ईरानी तेल पर लागू प्रतिबंधों की छूट को आगे नहीं बढ़ाएगा। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सामान्य लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। यह कदम दर्शाता है कि प्रशासन अब ऊर्जा की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए प्रतिबंधों में ढील देने की योजना नहीं बना रहा है।


भारत को मिला लाभ

हाल के समय में इन छूटों का सबसे अधिक लाभ भारत को मिला है। होर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न बाधाओं के बावजूद, भारत ने रूसी तेल की खरीद जारी रखी। रिपोर्टों के अनुसार, इस राहत अवधि में भारतीय रिफाइनरियों ने लगभग 30 मिलियन बैरल रूसी तेल के ऑर्डर दिए।


रिलायंस की रणनीति में बदलाव

शुरुआत में, रिलायंस जैसी प्रमुख भारतीय रिफाइनरियों ने अमेरिकी दबाव के कारण रूसी तेल की खरीद में कमी की थी, लेकिन जल्द ही उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए आयात को फिर से बढ़ा दिया। इस दौरान, लगभग सात सालों के बाद ईरान से कच्चे तेल की खेप लेकर दो सुपरटैंकर भी भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचे, जो व्यापारिक दृष्टि से भारत के लिए लाभकारी रहा।


लाइसेंस की जानकारी

मार्च में, जब ईरान ने होर्मुज मार्ग पर नियंत्रण को सख्त किया, तब अमेरिका ने ऊर्जा संकट से बचने के लिए 30 दिनों का लाइसेंस जारी किया। इस लाइसेंस के तहत 12 मार्च से पहले लादे गए रूसी कच्चे तेल की डिलीवरी और बिक्री की अनुमति दी गई थी, जो 11 अप्रैल को समाप्त हो गई।


ईरानी तेल की छूट

ईरानी तेल के लिए भी इसी तरह की एक छूट 20 मार्च को ट्रेजरी विभाग द्वारा जारी की गई थी, जिससे लगभग 140 मिलियन बैरल तेल वैश्विक बाजारों में पहुंच सका और युद्ध के दौरान ऊर्जा आपूर्ति पर पड़े दबाव को कम करने में मदद मिली। यह छूट 19 अप्रैल को समाप्त होने वाली है।