अमेरिका-ईरान वार्ता: 21 घंटे की बैठक के बाद भी कोई समाधान नहीं
इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे तक चली वार्ता ने कोई ठोस नतीजा नहीं निकाला। उपराष्ट्रपति JD वैंस ने ईरान से परमाणु हथियार बनाने की कोशिश न करने की गारंटी मांगी, लेकिन ईरान ने इसे अस्वीकार कर दिया। वार्ता के असफल होने से सभी निराश हैं, खासकर वैंस की भागीदारी के कारण। जानें इस वार्ता के प्रमुख बिंदु और आगे की संभावनाएँ क्या हो सकती हैं।
| Apr 13, 2026, 10:11 IST
बैठक का सारांश
इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे तक चली बैठक ने कोई ठोस नतीजा नहीं निकाला, लेकिन इसके भीतर की चर्चा अब धीरे-धीरे उजागर हो रही है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD वैंस के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने ईरान से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि वह परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं करेगा, यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरह से रोक देगा, और होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रखेगा, जो विश्व के प्रमुख जलमार्गों में से एक है।
ईरान की प्रतिक्रिया
ईरान ने अमेरिका की मांगों को अस्वीकार करते हुए कहा कि ये उचित नहीं हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने कहा कि वाशिंगटन को अपने तानाशाही रवैये को छोड़ना होगा ताकि दोनों पक्ष किसी समझौते पर पहुँच सकें और ईरानियों के अधिकारों का सम्मान किया जा सके।
बातचीत की उम्मीदें
बातचीत से पहले इतनी उम्मीदें क्यों थीं?
बातचीत के असफल होने से सभी निराश हैं, क्योंकि इससे वैश्विक स्तर पर बहुत उम्मीदें थीं, विशेषकर वैंस की भागीदारी के कारण। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वैंस के लिए यह एक महत्वपूर्ण कार्य था कि वह ईरान को बातचीत की मेज पर लाने में सफल हों।
एक अधिकारी ने बताया कि उपराष्ट्रपति को ईरान और अमेरिका के बीच अविश्वास और गलतफहमी के जोखिम का पता था, फिर भी वह तेहरान के वार्ताकारों के साथ अच्छे संबंध बनाने में सफल रहे। ट्रंप ने भी इस बात को स्वीकार किया कि बातचीत के अंत में वैंस की टीम ईरान के साथ मित्रवत हो गई थी। हालांकि, ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने से इनकार कर दिया, जिससे बातचीत असफल रही।
परमाणु कार्यक्रम का विवाद
ईरान का परमाणु कार्यक्रम: विवाद की मुख्य वजह
ईरान का परमाणु कार्यक्रम दोनों देशों के बीच विवाद का मुख्य कारण है। ईरान का कहना है कि उसका कार्यक्रम केवल नागरिक उद्देश्यों के लिए है, जबकि अमेरिका का आरोप है कि वह परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है। पिछले साल जून में इसी मुद्दे पर दोनों देशों के बीच 12 दिन तक युद्ध हुआ था।
वैंस ने अपनी ब्रीफिंग में कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को न छोड़ने के कारण बातचीत असफल रही, हालांकि उन्होंने इस पर विस्तार से कुछ नहीं बताया।
आगे की स्थिति
अब यह देखना बाकी है कि आगे क्या होता है, क्योंकि ट्रंप ने ईरान के सभी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों की नौसैनिक नाकेबंदी की घोषणा की है। हालांकि, उन्होंने कहा कि अमेरिका को उम्मीद है कि तेहरान वॉशिंगटन की शर्तों को स्वीकार करेगा।
