अफगानिस्तान-पाकिस्तान संघर्ष: क्षेत्रीय संतुलन पर प्रभाव
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच चल रहे संघर्ष ने क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित किया है। यह युद्ध केवल सीमा विवाद नहीं है, बल्कि इसमें भारत और चीन के हित भी शामिल हैं। जानें कैसे यह संघर्ष दक्षिण और मध्य एशिया की राजनीति को नया मोड़ दे सकता है और मानवीय संकट को जन्म दे रहा है।
| Mar 13, 2026, 11:57 IST
दक्षिण और मध्य एशिया में बढ़ता संघर्ष
वर्तमान में, विश्व की निगाहें पश्चिम एशिया के संघर्षों पर केंद्रित हैं, लेकिन इसी बीच दक्षिण और मध्य एशिया की सीमाओं पर एक ऐसा युद्ध भड़क उठा है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजरअंदाज किया जा रहा है। यह संघर्ष अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच की सीमा पर हो रहा है, जो केवल दो पड़ोसी देशों के बीच की झड़प नहीं है, बल्कि यह आने वाले वर्षों में पूरे क्षेत्र की सामरिक दिशा को प्रभावित कर सकता है।
युद्ध की शुरुआत और ताजा घटनाक्रम
यह युद्ध 27 फरवरी 2026 से शुरू हुआ और अब यह खुली सैन्य भिड़ंत में बदल चुका है। हाल के हमलों में, पाकिस्तान ने काबुल और कंधार जैसे महत्वपूर्ण शहरों पर हवाई और तोपखाने से हमले किए हैं, जिनमें नागरिकों की मौत की खबरें आई हैं। काबुल में चार लोगों की मौत और पंद्रह के घायल होने की पुष्टि हुई है, जबकि कंधार हवाई अड्डे के पास ईंधन भंडार को भी निशाना बनाया गया। तालिबान प्रशासन का दावा है कि इन हमलों में महिलाएं और बच्चे भी मारे गए हैं।
सीमा पार गोलाबारी और मानवीय संकट
पूर्वी अफगानिस्तान के खोस्त और पकतिया क्षेत्रों में भी सीमा पार गोलाबारी से लगातार मौतें हो रही हैं। तालिबान के अनुसार, एक ही परिवार के चार लोग, जिनमें दो बच्चे भी शामिल थे, तोप और मोर्टार हमले में मारे गए। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी के अंत से मार्च के पहले सप्ताह तक पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाई में 56 नागरिकों की जान जा चुकी है, जिनमें 24 बच्चे शामिल हैं। इस संघर्ष के कारण लगभग एक लाख पंद्रह हजार लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं।
संघर्ष की जड़ें और क्षेत्रीय प्रभाव
इस युद्ध की जड़ें पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पुरानी अविश्वास में हैं, जो तालिबान की सत्ता वापसी के बाद और गहरा गया है। इस्लामाबाद का आरोप है कि अफगानिस्तान की जमीन पर तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान नामक उग्रवादी संगठन को शरण दी जा रही है। यह संगठन पाकिस्तान में कई घातक हमलों के लिए जिम्मेदार रहा है।
भारत और चीन की भूमिका
इस संघर्ष का महत्व केवल अफगानिस्तान और पाकिस्तान तक सीमित नहीं है। भारत और चीन भी इस स्थिति में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं। पाकिस्तान की चिंता यह है कि अफगानिस्तान तेजी से भारत के प्रभाव क्षेत्र में आ रहा है। वहीं, भारत के लिए अफगानिस्तान के साथ मजबूत संबंध सामरिक लाभ का अवसर है।
भविष्य की संभावनाएं
चीन की भूमिका भी इस समीकरण में महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान की सेना और रक्षा व्यवस्था तेजी से चीनी तकनीक पर निर्भर हो रही है। 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच सीमित सैन्य कार्रवाई के दौरान यह नया समीकरण स्पष्ट हुआ। इस संघर्ष को केवल सीमा विवाद मानना भारी भूल होगी। यह एक नए सुरक्षा परिदृश्य की पहली झलक है, जिसमें अफगानिस्तान भारत का सहयोगी बन सकता है, जबकि पाकिस्तान चीन की सामरिक शक्ति का अग्रिम मोर्चा बन चुका है।
मानवीय संकट और क्षेत्रीय अस्थिरता
इस युद्ध का एक गंभीर पहलू मानवीय संकट है। सीमा क्षेत्रों में लगातार गोलाबारी से गांव खाली हो रहे हैं और हजारों परिवार विस्थापित हो चुके हैं। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो यह संकट पूरे क्षेत्र में अस्थिरता फैला सकता है।
निष्कर्ष
हालांकि दुनिया इस युद्ध को नजरअंदाज कर रही है, लेकिन यह अफगानिस्तान-पाकिस्तान टकराव दक्षिण और मध्य एशिया की राजनीति को नया मोड़ दे सकता है। यदि इसमें भारत और चीन के हित उलझते हैं, तो यह संघर्ष एक व्यापक भू-राजनीतिक मुकाबले का रूप ले सकता है।
