ऑस्टियोपोरोसिस के मरीजों के लिए खतरनाक है मानसून, बरतनी चाहिए ये सावधानियां

नई दिल्ली, 30 अगस्त (आईएएनएस)। मानसून का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन साथ ही यह कुछ स्वास्थ्य समस्याओं को और बढ़ा भी सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जिनको ऑस्टियोपोरोसिस है। ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे उनमें टूटने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में ऑस्टियोपोरोसिस के मरीजों के लिए मानसून काफी खतरनाक हो सकता है।
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ऑस्टियोपोरोसिस के मरीजों के लिए खतरनाक है मानसून, बरतनी चाहिए ये सावधानियां

नई दिल्ली, 30 अगस्त (आईएएनएस)। मानसून का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन साथ ही यह कुछ स्वास्थ्य समस्याओं को और बढ़ा भी सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जिनको ऑस्टियोपोरोसिस है। ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे उनमें टूटने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में ऑस्टियोपोरोसिस के मरीजों के लिए मानसून काफी खतरनाक हो सकता है।

मानसून की बारिश में रास्ते और घर के फर्श पर फिसलन बढ़ जाती है, जिससे गिरने का जोखिम भी बढ़ता है। अगर किसी व्यक्ति की हड्डियां पहले से ही कमजोर हैं, तो गिरने से हड्डी के टूटने का खतरा बना रहता है। इसके अलावा, मानसून में मौसम में बदलाव होता है। कभी अचानक ठंड बढ़ जाती है, तो कभी उमस हो जाती है। इस बदलाव के कारण वातावरण का दबाव कम हो जाता है, जो जोड़ों पर असर डालता है।

जब वातावरण में नमी होती है, तो यह हवा को ठंडा बना देती है, जिससे मांसपेशियां अकड़ जाती हैं और जोड़ों में अकड़न महसूस होने लगती है। ऐसे में ऑस्टियोपोरोसिस के मरीजों को दर्द और सूजन की समस्या बढ़ सकती है।

मानसून के दौरान ऑस्टियोपोरोसिस के मरीजों को खास सावधानी रखने की जरूरत होती है।

जोड़ों को गर्म रखना सबसे महत्वपूर्ण उपाय है। जब वातावरण में ठंडक हो, तो शरीर को गीला होने से बचाना चाहिए।

एनआईएच के मुताबिक, गर्म पानी से सिकाई करने से जोड़ों की अकड़न और सूजन कम हो सकती है। खासतौर से सुबह के समय जब दर्द ज्यादा होता है, तब सिकाई करना लाभकारी साबित हो सकता है।

इसके अलावा, घर के अंदर, बाथरूम और घर के अन्य हिस्सों में एंटी-स्लिप मैट्स लगाने चाहिए। गीले फर्श पर चलने के लिए ऐसे जूते या चप्पल पहने, जो फिसलन से बचाए रखें। अगर जरूरत हो, तो वॉकिंग स्टिक या वॉकर का इस्तेमाल करें, ताकि गिरने का खतरा कम हो।

ऑस्टियोपोरोसिस के मरीजों के लिए जरूरी है कि वे अपनी हड्डियों और जोड़ों को हल्के से व्यायाम के जरिए सक्रिय रखें। योग, वॉक, या स्ट्रेचिंग करने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और हड्डियों में लचीलापन भी बढ़ता है।

इसके अलावा, सही आहार ऑस्टियोपोरोसिस से बचने और उसका इलाज करने में अहम भूमिका निभाता है। कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर आहार हड्डियों को मजबूती देता है। मानसून में उपलब्ध पपीता, केला और अमरूद जैसे फल भी हड्डियों के लिए फायदेमंद होते हैं।

इसके अलावा, ऑस्टियोपोरोसिस के मरीजों को अपनी विटामिन डी की मात्रा भी नियमित रूप से चेक करानी चाहिए, क्योंकि यह हड्डियों के निर्माण में मदद करता है। सूर्य की हल्की धूप से विटामिन डी मिलता है, लेकिन अगर यह पर्याप्त नहीं हो तो डॉक्टर से सप्लीमेंट्स लेने की सलाह ली जा सकती है।

मानसून के दौरान अगर ऑस्टियोपोरोसिस का मरीज जोड़ों में दर्द, सूजन, लालिमा, या जोड़ों में अकड़न महसूस करता है, तो उसे तुरंत आर्थोपेडिक सर्जन से संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा, यदि कोई पुरानी चोट या हड्डी का फ्रैक्चर फिर से दर्द दे रहा है, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

--आईएएनएस

पीके/एएस