मस्सों के लिए प्रभावी आयुर्वेदिक उपचार
मस्सों की समस्या और उनके उपचार
आजकल, कई लोग त्वचा से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इनमें से कुछ समस्याएँ गंभीर होती हैं, जबकि अन्य को हल्का समझा जाता है। मस्से भी ऐसी ही एक समस्या हैं, जो आमतौर पर गंभीर नहीं मानी जाती। ये त्वचा पर उगने वाले छोटे उभार होते हैं, जो कैंसरजनक नहीं होते। फिर भी, कई लोग इन्हें हटाने के लिए उत्सुक रहते हैं, क्योंकि ये त्वचा की सुंदरता को प्रभावित करते हैं। क्या आप जानते हैं कि मस्से 'ह्युमन पैपिल्लोमा वायरस' के कारण होते हैं?
मस्सों के लिए आयुर्वेदिक उपचार
बरगद के पत्तों का रस मस्सों के लिए एक प्रभावी उपाय है। इसका उपयोग करने से त्वचा को आराम मिलता है और मस्से अपने आप गिर जाते हैं।
बंगला, मलबारी, कपूरी, या नागरबेल के पत्तों के डंठल का रस मस्सों पर लगाने से भी लाभ होता है। यदि मस्से नहीं गिरते हैं, तो पान में खाने का चूना मिलाकर घिसकर लगाएं।
कच्चे आलू का एक टुकड़ा नियमित रूप से दस मिनट तक मस्सों पर रखने से राहत मिलती है।
केले के छिलके को अंदर की तरफ से मस्सों पर रखकर पट्टी से बांधें। इसे दिन में दो बार करें और तब तक जारी रखें जब तक मस्से समाप्त नहीं हो जाते।
एक चम्मच कोथमीर के रस में हल्दी मिलाकर सेवन करने से भी मस्सों में कमी आती है।
लहसुन के एक टुकड़े को थोड़ा पीसकर मस्सों पर लगाकर पट्टी से बांधने से भी मदद मिलती है।
मस्से त्वचा पर बेडौल और रुखी सतह के रूप में प्रकट होते हैं। ये अपने आप विकसित होते हैं और कई बार अपने आप ही गायब हो जाते हैं, लेकिन कुछ मस्से दर्दनाक हो सकते हैं और लंबे समय तक बने रह सकते हैं।
अरंडी का तेल नियमित रूप से मस्सों पर लगाने से वे नरम हो जाते हैं और धीरे-धीरे गायब हो जाते हैं। कपूर का तेल भी एक विकल्प है।
ताजे मौसमी का रस एक बूँद मस्सों पर लगाकर पट्टी से बांधें। इसे दिन में 3-4 बार करें।
अम्लाकी को मस्सों पर मलते रहें जब तक कि वे रस को सोख न लें।
कसीसादी तेल को मस्सों पर लगाकर पट्टी से बांधें। प्याज़ का रस भी मस्सों को हटाने में मदद करता है। पपीते का क्षीर और थूहर का दूध या कार्बोलिक एसिड का सावधानीपूर्वक उपयोग भी प्रभावी होता है।
