वैश्विक सैन्य खर्च में वृद्धि: कतर सबसे आगे

दुनिया में सैन्य खर्च में तेजी से वृद्धि हो रही है, जिसमें कतर प्रति व्यक्ति सबसे अधिक खर्च करने वाला देश बन गया है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में वैश्विक सैन्य खर्च 2.88 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। अमेरिका, चीन, और रूस जैसे बड़े देशों के साथ-साथ कतर और इजराइल भी अपने सैन्य खर्च में वृद्धि कर रहे हैं। जानें इस विषय पर और क्या जानकारी है और कौन से देश शीर्ष पर हैं।
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दुनिया में सैन्य खर्च का बढ़ता दबाव

दुनिया भर में तनाव की स्थिति लगातार बढ़ती जा रही है, और हर नए दशक में युद्ध के नए मोर्चे खुलते जा रहे हैं। युद्ध की तकनीक भी बदल रही है। इराक और अफगानिस्तान में संघर्ष ने देशों को हवाई शक्ति को बढ़ाने के लिए प्रेरित किया, जबकि हाल के ईरान-इजराइल और रूस-यूक्रेन संघर्ष ने एआई, ड्रोन और एयर डिफेंस पर खर्च बढ़ाने की आवश्यकता को उजागर किया है। इस प्रकार, वैश्विक स्तर पर देश तेजी से एयर डिफेंस पर निवेश कर रहे हैं और ड्रोन तकनीक पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। तीसरे विश्व युद्ध के संभावित खतरे के साथ, देशों का रक्षा बजट भी बढ़ रहा है।


सैन्य खर्च का वैश्विक आंकड़ा

वैश्विक सैन्य खर्च में वृद्धि: कतर सबसे आगे
न अमेरिका-न रूस, सेना और हथियारों पर ये छोटा-सा मुस्लिम देश कर रहा सबसे ज्यादा खर्च


स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में वैश्विक सैन्य खर्च 2.88 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.9 प्रतिशत अधिक है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि दुनिया के हर व्यक्ति पर औसतन 350 डॉलर का सैन्य खर्च है, जो भारतीय मुद्रा में 33,000 रुपये से अधिक है।


कतर का सैन्य खर्च

जब सैन्य खर्च की बात आती है, तो अमेरिका और रूस हमेशा शीर्ष पर होते हैं। लेकिन यदि प्रति व्यक्ति खर्च की बात करें, तो कतर इस मामले में सबसे आगे है। कतर ने 2006 में प्रति व्यक्ति 1231 डॉलर से बढ़कर 2022 तक 5428 डॉलर खर्च किया है, जो 340 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।


इजराइल का खर्च भी उल्लेखनीय है, जो 1360 डॉलर से बढ़कर 5108 डॉलर हो गया है, यानी 276 प्रतिशत की वृद्धि। नॉर्वे तीसरे स्थान पर है, जिसका खर्च 1080 डॉलर से बढ़कर 3040 डॉलर हो गया है।


सैन्य खर्च में शीर्ष देश

2025 में सबसे अधिक सैन्य खर्च करने वाले देशों में अमेरिका (954 अरब डॉलर), चीन (336 अरब डॉलर), रूस (190 अरब डॉलर), जर्मनी (114 अरब डॉलर) और भारत (92 अरब डॉलर) शामिल हैं। ये पांच देश मिलकर वैश्विक सैन्य खर्च का 58 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं।


दूसरे विश्व युद्ध के बाद से अमेरिका हमेशा से सबसे अधिक खर्च करने वाला देश रहा है, और इसका 954 अरब डॉलर का खर्च अन्य छह देशों के कुल खर्च से भी अधिक है।