वेनेजुएला के तेल उद्योग में अमेरिकी हस्तक्षेप की संभावना
वेनेजुएला के तेल उद्योग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणियों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी है। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका अपनी बड़ी तेल कंपनियों के माध्यम से वेनेजुएला के तेल क्षेत्र को पुनर्जीवित करने की योजना बना रहा है। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल भंडार है, लेकिन देश अपने उत्पादन का पूरा लाभ नहीं उठा सका है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी कंपनियों का निवेश आवश्यक है, लेकिन यह एक लंबी प्रक्रिया होगी। इस स्थिति का चीन पर भी बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।
| Jan 4, 2026, 22:53 IST
वेनेजुएला का तेल उद्योग और अमेरिकी रुचि
दक्षिण अमेरिका का तेल से समृद्ध देश वेनेजुएला एक बार फिर वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार में चर्चा का विषय बन गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में वेनेजुएला के तेल क्षेत्र के बारे में कड़ी टिप्पणी की है, जिसमें उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र लंबे समय से बर्बादी की स्थिति में है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि अमेरिका अपनी प्रमुख तेल कंपनियों की सहायता से वेनेजुएला के तेल उद्योग को पुनर्जीवित करने की योजना बना रहा है।
ट्रंप का कहना है कि अमेरिकी समर्थन मिलने पर वेनेजुएला का तेल उद्योग भारी लाभ कमा सकता है, जिसके लिए अरबों डॉलर का निवेश किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल भंडार है, जो सरकारी आंकड़ों के अनुसार लगभग 300 अरब बैरल तक हो सकता है, जो सऊदी अरब से भी अधिक है। कुछ अंतरराष्ट्रीय आकलनों के अनुसार, वैश्विक तेल भंडार का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा वेनेजुएला में हो सकता है।
हालांकि, इतनी विशाल क्षमता के बावजूद, वेनेजुएला अपने तेल उत्पादन का पूरा लाभ नहीं उठा सका है। 1999 में ह्यूगो शावेज के सत्ता में आने के समय, देश का तेल उत्पादन लगभग 35 लाख बैरल प्रतिदिन था, लेकिन अब यह घटकर करीब 10 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया है। इसके विपरीत, अमेरिका अकेले 1.3 करोड़ बैरल से अधिक तेल का उत्पादन कर रहा है।
ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका की बड़ी तेल कंपनियां, जैसे एक्सॉन मोबिल और कोनोकोफिलिप्स, वेनेजुएला के जर्जर ढांचे को सुधारने में मदद करेंगी। ये कंपनियां शावेज के राष्ट्रीयकरण से पहले वहां सक्रिय थीं, जबकि वर्तमान में केवल शेवरॉन ही सीमित रूप से काम कर रही है। हालांकि, इन कंपनियों ने अभी तक किसी ठोस निवेश की घोषणा नहीं की है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी कंपनियां वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी पीडीवीएसए के साथ साझेदारी कर सकती हैं, जिसमें निवेश के बदले मुनाफे में हिस्सेदारी तय की जाएगी। पीडीवीएसए की कमजोर आर्थिक स्थिति को देखते हुए विदेशी कंपनियों के लिए शर्तें अनुकूल हो सकती हैं। हालांकि, इतिहास बताता है कि जबरन सत्ता परिवर्तन के बाद तेल उत्पादन को स्थिर होने में समय लगता है, जैसा कि लीबिया और इराक के मामलों में देखा गया है।
इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा प्रभाव चीन पर पड़ता दिख रहा है, क्योंकि वेनेजुएला का लगभग 80 प्रतिशत कच्चा तेल चीन को भेजा जाता है। यह तेल चीन को दिए गए पुराने कर्ज की भरपाई के रूप में भेजा जाता रहा है। अनुमान है कि चीन ने 2007 से 2016 के बीच वेनेजुएला को लगभग 105 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता दी थी। यदि अमेरिका तेल उद्योग पर नियंत्रण स्थापित करता है, तो चीन के लिए सस्ती ऊर्जा आपूर्ति और कर्ज वसूली दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
चीनी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी कदम की कड़ी आलोचना की है और इसे एक संप्रभु देश के खिलाफ बल प्रयोग करार दिया है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निकट भविष्य में कच्चे तेल की कीमतों पर इसका कोई स्थायी प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन प्रतिबंधों में ढील और राजनीतिक अस्थिरता के कारण बाजार में अस्थायी उतार-चढ़ाव संभव है।
ऊर्जा विश्लेषकों के अनुसार, यदि वेनेजुएला को अपने स्वर्णिम तेल उत्पादन दौर में लौटना है, तो इसके लिए दशकों तक लगातार निवेश और पश्चिमी तेल कंपनियों की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता आवश्यक होगी। इसका मतलब है कि तेल उत्पादन की बहाली संभव है, लेकिन यह एक लंबी और जटिल प्रक्रिया होगी।
