मुंबई में 5 करोड़ की जमीन बेचने पर टैक्स से मिली राहत
किसी ने नहीं सोचा था कि ऐसा होगा
मुंबई के एक निवासी ने 5 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति बेचने के बावजूद एक रुपये का भी टैक्स नहीं चुकाया और अदालत से राहत प्राप्त की। यह मामला अब टैक्सपेयर्स के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उल्लेखनीय है कि इस व्यक्ति ने समय पर आयकर रिटर्न (ITR) भी दाखिल नहीं किया था, फिर भी उसे लंबी कानूनी लड़ाई के बाद लाभ मिला। मुंबई ITAT ने अपने निर्णय में कहा कि यदि टैक्सपेयर्स ने पूंजीगत लाभ (LTCG) की राशि का उपयोग नई संपत्ति खरीदने में किया है, तो केवल CGAS खाते में धन जमा न करने के आधार पर छूट नहीं रोकी जा सकती।
मामले का संक्षिप्त विवरण
विले पार्ले के निवासी बाबूलाल ने 2017 में तीन भूखंडों को लगभग 5.03 करोड़ रुपये में बेचा। इस बिक्री से उन्हें लगभग 3.68 करोड़ रुपये का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन प्राप्त हुआ। उन्होंने आयकर कानून की धारा 54 के तहत टैक्स छूट का दावा किया, जिसके अनुसार बिक्री से प्राप्त राशि का उपयोग नई रिहायशी संपत्ति खरीदने में करना आवश्यक है। यदि समय पर नई संपत्ति नहीं खरीदी जाती है, तो पूंजीगत लाभ खाता योजना में धन जमा करना आवश्यक होता है।
लेट ITR के बावजूद मिली राहत
बाबूलाल ने निर्धारित समय पर ITR दाखिल नहीं किया और बढ़ी हुई डेडलाइन के बाद 28 दिसंबर 2018 को ITR प्रस्तुत किया। हालांकि, उन्होंने इससे चार दिन पहले नई संपत्ति खरीदने के लिए 8.45 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया था। इसी आधार पर उन्होंने टैक्स छूट की मांग की। आयकर विभाग ने कहा कि उन्होंने समय पर CGAS खाते में धन जमा नहीं किया, इसलिए छूट नहीं मिल सकती। मामला ITAT मुंबई में पहुंचा।
ITAT का राहत देने का कारण
ITAT मुंबई ने अपने निर्णय में कहा कि यदि टैक्सपेयर्स ने लेटेड ITR दाखिल करने से पहले पूरी राशि नई संपत्ति में निवेश कर दी है, तो CGAS में धन जमा करना अनिवार्य नहीं है। ट्रिब्यूनल ने यह भी माना कि जब पूरा LTCG नई संपत्ति खरीदने में खर्च हो चुका था, तब कोई अनयूज्ड राशि बची ही नहीं थी। इसलिए टैक्स छूट को रोका नहीं जा सकता। हालांकि, ट्रिब्यूनल ने निर्धारण अधिकारी को नई संपत्ति खरीद से संबंधित दस्तावेजों की जांच करने का निर्देश दिया।
आम टैक्सपेयर्स के लिए सीख
इस निर्णय से उन लोगों को राहत मिल सकती है जो किसी कारणवश समय पर ITR दाखिल नहीं कर पाते, लेकिन बाद में LTCG की राशि का उपयोग नई संपत्ति खरीदने में कर देते हैं। हालांकि, टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि हर मामले के तथ्य अलग होते हैं। इसलिए निवेश या टैक्स योजना बनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
