मालदीव और बांग्लादेश की भारत से मदद की गुहार

मालदीव और बांग्लादेश, जो पहले भारत के खिलाफ थे, अब ईरान-अमेरिका संघर्ष के चलते भारत से ईंधन की मदद मांग रहे हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि कैसे दोस्ती और दुश्मनी का चक्र चलता है। भारत, जो दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर है, पहले से ही अपने अन्य पड़ोसी देशों को ईंधन की आपूर्ति कर रहा है। जानें इस संकट की पूरी कहानी और भारत की भूमिका के बारे में।
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दोस्ती और दुश्मनी का चक्र

कहते हैं कि दुनिया गोल है और समय के साथ चीजें वापस उसी स्थान पर लौट आती हैं। दोस्ती और दुश्मनी का यह खेल भी कुछ ऐसा ही है। मालदीव और बांग्लादेश, जो पहले अच्छे मित्र थे, फिर दुश्मन बने और अब फिर से दोस्ती की ओर बढ़ रहे हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि कभी-कभी जिनसे हम दूर हो जाते हैं, वही संकट के समय में हमारे पास लौट आते हैं। हाल ही में, इन दोनों देशों ने भारत से मदद मांगी है। ईरान में चल रहे संघर्ष के कारण, इन देशों को भारत की याद आ रही है।


भारत सरकार ने पुष्टि की है कि मालदीव और बांग्लादेश, दोनों ही ईंधन की आपूर्ति के लिए भारत से संपर्क कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत अपने पड़ोसी देशों को ईंधन की निरंतर आपूर्ति कर रहा है।


मालदीव की स्थिति की बात करें तो, यह आमतौर पर ओमान से ईंधन प्राप्त करता है। लेकिन ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण, पश्चिम एशिया से तेल की शिपिंग में बाधा आ गई है। इससे मालदीव को ईंधन की कमी का सामना करना पड़ रहा है।


भारत, जो दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर है, पहले से ही बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और श्रीलंका को ईंधन की आपूर्ति कर रहा है। हाल ही में, श्रीलंका को 38,000 टन पेट्रोलियम भेजा गया है।


मालदीव के राष्ट्रपति मुहम्मद मुइज्जू ने पहले भारत के खिलाफ 'इंडिया आउट' का नारा दिया था और चीन के करीब चले गए थे। लेकिन अब जब संकट आया है, तो भारत ही उनकी मदद के लिए आगे आया है।


भारत का दिल बड़ा है और वह अपने पड़ोसियों को कभी अकेला नहीं छोड़ता। चाहे वह यूक्रेन का संकट हो या इजरायल-पैलेस्टाइन का, भारत ने हमेशा अपने पड़ोसियों की मदद की है।