भारत में सुपर एल नीन्यो का प्रभाव: गर्मी के रिकॉर्ड टूटने की संभावना

इस वर्ष भारत में सुपर एल नीन्यो के प्रभाव से गर्मी के रिकॉर्ड टूटने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशांत महासागर में पानी का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जिससे भारत में सूखा और गर्मी की लहरें बढ़ सकती हैं। जानें कि एल नीन्यो वास्तव में क्या है और यह भारत के मौसम को कैसे प्रभावित करता है।
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भारत में सुपर एल नीन्यो का प्रभाव: गर्मी के रिकॉर्ड टूटने की संभावना gyanhigyan

एल नीन्यो का परिचय

इस वर्ष भारत में गर्मी बढ़ने की संभावना है, क्योंकि 'एल नीन्यो' का प्रभाव देखने को मिलेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह 'सुपर एल नीन्यो' हो सकता है, जिससे गर्मी के सभी रिकॉर्ड टूट सकते हैं। लेकिन, एल नीन्यो वास्तव में क्या है? इसे समझना आवश्यक है। एल नीन्यो का अर्थ स्पेनिश में 'छोटा लड़का' है, जो हर कुछ वर्षों में लौटकर आता है और भारत में गर्मी बढ़ाता है। इसका नाम स्पेनिश में होने का कारण यह है कि दक्षिण अमेरिका के कई देशों पर स्पेन का शासन था।


एल नीन्यो का प्रभाव

एल नीन्यो का प्रभाव तब होता है जब प्रशांत महासागर के पूर्वी हिस्से का पानी ठंडा रहता है, जबकि पश्चिमी हिस्से का पानी गर्म होता है। सामान्यतः, ट्रेड विंड्स गर्म पानी को पश्चिम की ओर धकेलती हैं, लेकिन हर 2 से 7 वर्षों में ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे गर्म पानी पूर्व की ओर बहने लगता है। इससे दक्षिण अमेरिका में बारिश होती है, लेकिन भारत में बारिश कम हो जाती है।


भारत में मौसम पर असर

भारत का मॉनसून मुख्यतः दक्षिण-पश्चिम हवाओं से आता है, लेकिन एल नीन्यो के कारण ये हवाएं कमजोर हो जाती हैं। इससे भारत में बादल कम बनते हैं और गर्मी बढ़ जाती है। पिछले साल भी जब एल नीन्यो सक्रिय था, तब कई शहरों में तापमान 45-48 डिग्री तक पहुंच गया था।


सुपर एल नीन्यो की चेतावनी

इस वर्ष, विशेषज्ञों का मानना है कि एल नीन्यो 'सुपर एल नीन्यो' बन सकता है। प्रशांत महासागर में पानी की सतह का तापमान तेजी से बढ़ रहा है। यदि यह 2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता है, तो यह 1950 के बाद से सबसे मजबूत एल नीन्यो हो सकता है। इससे भारत में गर्मी और हीटवेव की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।


भविष्य की चुनौतियाँ

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सुपर एल नीन्यो बनता है, तो भारत में सूखा और गर्मी की लहरें बढ़ सकती हैं। उत्तर भारत, मध्य भारत और पश्चिम भारत पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा।