भारत ने विदेशों से वापस मंगाया 104 टन सोना, जानें इसके पीछे की वजहें

भारत ने हाल ही में अपने सोने को विदेशों से वापस लाने की प्रक्रिया को तेज किया है। रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, अब देश में 680 टन सोना सुरक्षित है, जबकि 197.67 टन अभी भी विदेशों में है। यह कदम रूस-यूक्रेन युद्ध और अन्य वैश्विक जोखिमों के चलते उठाया गया है। जानें कि क्यों कई अन्य देश भी अपने सोने को वापस मंगा रहे हैं और इसके पीछे की रणनीतियाँ क्या हैं।
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भारत का सोना वापस लाने का अभियान

नई दिल्ली: भारत तेजी से अपने सोने को विदेशों से वापस ला रहा है। रिजर्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास कुल 880.52 टन सोने में से लगभग 77% यानी करीब 680 टन अब देश में सुरक्षित है, जबकि 197.67 टन अभी भी बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के पास है। पिछले छह महीनों में 104.23 टन सोना वापस लाया गया है.


वैश्विक जोखिमों का प्रभाव

इकॉनमिक टाइम्स के अनुसार, यह बदलाव रूस-यूक्रेन युद्ध और अफगानिस्तान के विदेशी भंडार के फ्रीज होने जैसी घटनाओं के कारण बढ़ते वैश्विक जोखिमों से संबंधित है। अब केंद्रीय बैंक सोने को केवल संपत्ति नहीं, बल्कि एक रणनीतिक सुरक्षा के रूप में देख रहे हैं। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़कर 16.7% हो गई है.


विदेश में सोने का भंडारण

विदेश में सोना रखने के पीछे कई कारण थे, जैसे कि वहां सोने की खरीद-फरोख्त की प्रक्रिया आसान और तेज होती थी। लेकिन अब, बदलते वैश्विक माहौल में जोखिम बढ़ गया है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय लेनदेन में सुविधा और राजनीतिक कारणों से संपत्तियों का फ्रीज होना भी एक चिंता का विषय है.


सोने के भंडार की स्थिति

रिजर्व बैंक की छमाही रिपोर्ट के अनुसार, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। घरेलू भंडार में वृद्धि हुई है, जहां भारत के भीतर रखा सोना 575.8 मीट्रिक टन से बढ़कर 680 मीट्रिक टन हो गया है. पिछले छह महीनों में RBI ने 104.2 मीट्रिक टन सोना वापस लाया है.


वैश्विक रुझान

भारत ही नहीं, बल्कि कई अन्य देश भी विदेशी जोखिमों से बचने के लिए अपना सोना वापस मंगा रहे हैं। उदाहरण के लिए, फ्रांस ने 2026 की शुरुआत में न्यूयॉर्क फेडरल रिजर्व से 129 टन सोना वापस लाया। इसी तरह, सर्बिया और जर्मनी भी अपने सोने की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं.