पाकिस्तान और चीन को यूएन में बड़ा झटका, अमेरिका ने किया विरोध
पाकिस्तान की आतंकवाद से जुड़ी साजिशें
पाकिस्तान में आतंकवादी गतिविधियों का संचालन खुलेआम होता है, और यह बात किसी से छिपी नहीं है कि वहां की सरकार और सेना इनका समर्थन करती है। ये आतंकी संगठन विशेष रूप से भारत के खिलाफ काम करते हैं। हालांकि, पाकिस्तान अपने इन काले कारनामों को छुपाने के लिए लगातार नए प्रोपेगेंडा पेश करता है। हाल ही में, जब पाकिस्तान ने अपने मित्र चीन के सहारे भारत को फंसाने की कोशिश की, तो अमेरिका ने ऐसा कदम उठाया कि पाकिस्तान की सारी योजनाएँ ध्वस्त हो गईं। यह एक पुरानी कहावत की तरह है कि 'सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली', क्योंकि पाकिस्तान आतंकवाद को लेकर भारत को घेरने की कोशिश कर रहा था, लेकिन अमेरिका ने उसकी इस चाल को नाकाम कर दिया।
यूएन में पाकिस्तान और चीन को झटका
पाकिस्तान और चीन को संयुक्त राष्ट्र में एक बड़ा झटका लगा है। अमेरिका ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएएलए) और उसकी मजीद ब्रिगेड को यूएन की प्रतिबंधित सूची में डालने के प्रस्ताव को रोक दिया है। अमेरिका का कहना है कि इन संगठनों के अलकायदा या आईएसआईएस से जुड़े होने का कोई ठोस सबूत नहीं है। यह पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर के लिए एक बड़ा झटका है, जो लगातार बलूच संगठनों को भारत से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
भारत की कूटनीतिक सफलता
पाकिस्तान और चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 आतंकवाद प्रतिबंध व्यवस्था के तहत बीएएलए और मस्जिद ब्रिगेड को प्रतिबंधित सूची में डालने का प्रस्ताव रखा था। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि यदि ये संगठन आतंकवादी घोषित हो जाते हैं, तो वह भारत को आतंकवाद के मुद्दे पर घेरने का प्रोपेगेंडा शुरू कर सकेगा। लेकिन भारत ने इस मामले में सक्रिय कूटनीति का प्रदर्शन किया, और फ्रांस ने भी भारत का समर्थन किया। यह स्थिति उस समय की याद दिलाती है जब पाकिस्तान ने चीन की मदद से भारत के प्रस्तावों को रोकने की कोशिश की थी।
