ट्रंप ने ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने की योजना का किया ऐलान
अमेरिका में बढ़ती पेट्रोल की कीमतें
वॉशिंगटन/दुबई, 1 अप्रैल 2026 — अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष को अगले दो-तीन हफ्तों में समाप्त करने की घोषणा की है, भले ही होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) अभी भी बंद हो और कोई समझौता न हुआ हो। इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण अमेरिका में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें मानी जा रही हैं।
संघर्ष शुरू होने के बाद से अमेरिका में औसत पेट्रोल की कीमत $4 प्रति गैलन (लगभग ₹330 प्रति लीटर) तक पहुंच गई है, जो 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। एक महीने पहले कीमतें लगभग $3 प्रति गैलन थीं, लेकिन अब यह $1 से अधिक बढ़ चुकी हैं। कुछ राज्यों में यह $5 प्रति गैलन तक पहुंच गई है। डीजल की कीमतें भी $5 के करीब पहुंच गई हैं, जिससे परिवहन और किराने के सामान पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
ट्रंप का यू-टर्न
ट्रंप ने ओवल ऑफिस से कहा, "हम दो-तीन हफ्तों में ईरान से बाहर निकल जाएंगे। ईरान को किसी डील की आवश्यकता नहीं है। ईरान को 'स्टोन एज' पर पहुंचा दिया गया है, अब हम जा रहे हैं।" उन्होंने सहयोगी देशों, विशेषकर यूरोपीय देशों पर तंज करते हुए कहा, "अपना तेल खुद लाओ, अमेरिका अब और नहीं लड़ सकता। होर्मुज खुला है या नहीं, इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता।"
पहले ट्रंप ने होर्मुज को खोलने के लिए अल्टीमेटम दिया था और ईरान के पावर प्लांट्स को नष्ट करने की धमकी दी थी, लेकिन अब वे इस पर जोर नहीं दे रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि घरेलू आर्थिक दबाव ने उन्हें यह निर्णय लेने पर मजबूर किया है।
कीमतों में वृद्धि के कारण
- होर्मुज का बंद होना: दुनिया के लगभग 20% तेल सप्लाई इसी जलडमरूमध्य से गुजरती है। ईरान के हमलों और खदानों के कारण शिपिंग लगभग ठप हो गई है।
- क्रूड ऑयल की कीमतें: ब्रेंट क्रूड की कीमतें $94-100 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जबकि कुछ समय पहले यह $80 के आसपास थी।
- अमेरिकी प्रभाव: अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक है, लेकिन वैश्विक बाजार के कारण घरेलू पेट्रोल की कीमतें भी प्रभावित हुई हैं। स्प्रिंग ब्रेक और यात्रा के मौसम ने और दबाव बढ़ाया है।
वैश्विक प्रभाव
- यूरोप और एशिया के कई देशों में भी ईंधन की कीमतें बढ़ी हैं।
- ट्रंप ने सहयोगियों से कहा कि वे खुद होर्मुज की सुरक्षा करें या अपना तेल खुद प्रबंधित करें।
- ईरान ने अब तक किसी समझौते से इनकार किया है और होर्मुज को पूरी तरह बंद रखने की चेतावनी दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध समाप्त होने के बाद भी कीमतें तुरंत नहीं गिरेंगी। सप्लाई चेन में व्यवधान, टैंकर बैकलॉग और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के कारण असर कुछ हफ्तों या महीनों तक बना रह सकता है।
ट्रंप की यह जल्दबाजी दर्शाती है कि विदेश नीति के निर्णय अब घरेलू अर्थव्यवस्था और वोट बैंक से सीधे जुड़े हुए हैं। ईरान के खिलाफ अमेरिका ने भारी सैन्य दबाव बनाया, लेकिन पेट्रोल पंप पर आम अमेरिकी की चिंता अब युद्ध को छोटा करने की मजबूरी बन गई है।
अभी देखना बाकी है कि ट्रंप का यह प्लान कितना सफल होता है और होर्मुज बंद रहने पर वैश्विक तेल बाजार कितना अस्थिर रहता है।
