जयपुर में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान हस्तशिल्प प्रदर्शनी का आयोजन
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत की लोकतांत्रिक शक्ति का प्रदर्शन
जयपुर में आयोजित 28वीं कॉन्फ्रेंस ऑफ स्पीकर्स एंड प्रेसिडिंग ऑफिसर्स ऑफ द कॉमनवेल्थ (CSPOC-2026) में 60 से अधिक देशों के स्पीकर्स और IPU एवं CPA के अध्यक्षों की भागीदारी ने भारत की लोकतांत्रिक ताकत को वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण स्वर दिया। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के बाद, जयपुर ने 60 से अधिक देशों से आए विशिष्ट अतिथियों की मेज़बानी का गौरव प्राप्त किया।
राजस्थान की संस्कृति का भव्य प्रदर्शन
इस अवसर पर राजस्थान की समृद्ध संस्कृति, आत्म-सम्मान और अतिथि-सत्कार को प्रदर्शित करने के लिए कांस्टीट्यूशनल क्लब ऑफ राजस्थान में एक भव्य स्वागत समारोह, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सहभोज का आयोजन किया गया। इस गरिमामयी आयोजन के तहत Rajasthali Emporium द्वारा 'क्राफ्ट कला के' नामक विशेष हस्तशिल्प प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें राजस्थान की पारंपरिक कला और शिल्प कौशल की अद्भुत झलक प्रस्तुत की गई।
हस्तशिल्प प्रदर्शनी की विशेषताएँ
प्रदर्शनी की एक खास बात यह थी कि इसमें राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिल्पगुरुओं को आमंत्रित किया गया, जिन्होंने अपने जीवंत प्रदर्शन और संवाद के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों को भारतीय हस्तकला की तकनीक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से अवगत कराया।
अतिथियों के लिए विशेष भ्रमण
इस अवसर पर, Rajasthali Emporium की निदेशक माया ठाकुर ने सभी अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय अतिथियों को 'क्राफ्ट कला के' प्रदर्शनी का भ्रमण कराया और उन्हें विभिन्न शिल्पगुरुओं से परिचित कराया। उनके मार्गदर्शन में अतिथियों ने राजस्थान की विविध शिल्प विधाओं को निकट से देखा और समझा, जिससे भारत की सांस्कृतिक विरासत के प्रति गहरी सराहना उत्पन्न हुई।
कार्यक्रम की गरिमा
कार्यक्रम की गरिमा राज्यपाल हरिभाऊ बागडे, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की उपस्थिति से और बढ़ गई। उनकी सहभागिता ने इस आयोजन को ऐतिहासिक महत्व प्रदान किया। विधानसभा अध्यक्ष ने प्रदर्शनी में प्रस्तुत शिल्पगुरुओं के लाइव डेमो की विशेष सराहना की और राजस्थान की पारंपरिक हस्तशिल्प कला को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने के प्रयासों की प्रशंसा की।
भारत की सांस्कृतिक पहचान का वैश्विक मंच
यह आयोजन भारत के लोकतंत्र की सशक्त छवि के साथ-साथ राजस्थान की जीवंत सांस्कृतिक पहचान और हस्तशिल्प परंपरा को विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
