चीन: तम्बाकू उत्पादन का वैश्विक केंद्र और इसके प्रभाव
तम्बाकू का वैश्विक परिदृश्य
तम्बाकू, जो कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बनता है, का उपयोग विश्वभर में जारी है, विशेषकर चीन में, जिसे तम्बाकू का गढ़ माना जाता है। विश्व तंबाकू निषेध दिवस (31 मई) के अवसर पर, आइए जानते हैं कि चीन कैसे तम्बाकू का प्रमुख उत्पादक बना, कौन से देश इसका उपयोग करते हैं, और चीन तम्बाकू से कौन-कौन से उत्पाद बनाता है।
चीन की तम्बाकू नीति
चीन की तम्बाकू सफलता कोई संयोग नहीं है, बल्कि यह एक दीर्घकालिक सरकारी नीति का परिणाम है। 1980 के दशक में, जब अन्य देशों ने तम्बाकू पर प्रतिबंध लगाना शुरू किया, चीन ने इसे अपनी अर्थव्यवस्था का आधार बनाने का निर्णय लिया। चाइना नेशनल टोबैको कॉर्पोरेशन, जो सरकारी स्वामित्व में है, दुनिया की सबसे बड़ी तम्बाकू कंपनी है।
चीन का तम्बाकू उत्पादन
चीन विश्व के कुल तम्बाकू उत्पादन का लगभग 35-40 प्रतिशत हिस्सा प्रदान करता है, जिसका वार्षिक उत्पादन 21 से 24 लाख मीट्रिक टन है। यहां हर मिनट लाखों सिगरेट के पैक तैयार होते हैं।
चीन के तम्बाकू का सबसे बड़ा खरीदार
चीन का व्यापारिक नेटवर्क विशाल है, और यह केवल कच्चा तम्बाकू ही नहीं, बल्कि प्रोसेस्ड तम्बाकू भी निर्यात करता है। अमेरिका मूल्य के आधार पर सबसे बड़ा खरीदार है, जबकि इंडोनेशिया और वियतनाम भी महत्वपूर्ण ग्राहक हैं।
तम्बाकू के विविध उपयोग
चीन तम्बाकू का उपयोग केवल सिगरेट बनाने के लिए नहीं करता, बल्कि इसे जैव-संसाधन के रूप में भी इस्तेमाल करता है। निकोटीन सल्फेट का उपयोग कीटनाशकों में किया जाता है, और तम्बाकू के अर्क का उपयोग दवाओं में भी होता है।
दुनिया के शीर्ष तम्बाकू उत्पादक देश
चीन इस क्षेत्र में सबसे आगे है, लेकिन भारत, ब्राजील, जिम्बाब्वे और इंडोनेशिया भी महत्वपूर्ण उत्पादक हैं। भारत, जो चीन का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी है, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में तम्बाकू की खेती करता है।
भविष्य की दिशा
चीन अब पारंपरिक सिगरेट से आगे बढ़कर हीट-नॉट-बर्न तकनीक और ई-सिगरेट पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। यह जानता है कि भविष्य में धुआं कम होगा और निकोटीन वेपर की मांग बढ़ेगी।
