चंदौली में साइको किलर का अंत: 26 घंटे में तीन हत्याएं और पुलिस मुठभेड़

उत्तर प्रदेश के चंदौली में एक पूर्व सैनिक गुरप्रीत सिंह ने 26 घंटे के भीतर तीन हत्याएं कीं, जिससे क्षेत्र में दहशत फैल गई। उसकी हर हत्या एक ही पैटर्न पर आधारित थी। पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन वह भागने में सफल रहा। अंततः, एक मुठभेड़ में पुलिस ने उसे मार गिराया। जानिए इस खौफनाक घटना की पूरी कहानी और पुलिस की कार्रवाई के बारे में।
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चंदौली में साइको किलर का अंत: 26 घंटे में तीन हत्याएं और पुलिस मुठभेड़ gyanhigyan

चंदौली में मुठभेड़ में मारा गया साइको किलर

उत्तर प्रदेश के चंदौली और वाराणसी में आतंक का पर्याय बने गुरप्रीत सिंह का अंत हो गया है। यह पूर्व सैनिक, जिसने 26 घंटे के भीतर तीन निर्दोष लोगों की हत्या की, सोमवार रात पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारा गया। यह घटना किसी थ्रिलर फिल्म की तरह है, जिसमें एक बेताब हत्यारा बिना किसी कारण के लोगों को निशाना बना रहा था। सोमवार सुबह, चंदौली के एक निजी अस्पताल में तीसरी हत्या के बाद, उसे भीड़ ने पकड़कर पुलिस को सौंप दिया।


पुलिस की कार्रवाई और गुरप्रीत की चालाकी

चंदौली के एसपी आकाश पटेल ने बताया कि पुलिस ने आरोपी को उन स्थानों पर ले जाकर घटनाओं का पुनर्निर्माण किया। इसी दौरान, गुरप्रीत ने एक पुलिस अधिकारी की पिस्टल छीनकर फायरिंग शुरू कर दी और अंधेरे का फायदा उठाकर भागने लगा। पुलिस ने उसे आत्मसमर्पण करने के लिए कहा, लेकिन उसने गोलीबारी जारी रखी। जवाबी फायरिंग में उसे दो गोलियां लगीं, और गंभीर स्थिति में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया।


गुरप्रीत का खौफनाक सफर

गुरप्रीत सिंह ने रविवार सुबह से सोमवार सुबह तक तीन हत्याएं कीं, सभी में एक ही पैटर्न था - कनपटी पर गोली मारना। पहली हत्या गाजीपुर के मंगरू की थी, जो ट्रेन में यात्रा कर रहा था। दूसरी हत्या जम्मूतवी एक्सप्रेस में दिनेश की हुई, और तीसरी हत्या एक अस्पताल में लक्ष्मीना देवी की।


अस्पताल में हत्या के बाद, एक साहसी ऑटो चालक ने उसे पकड़ लिया और पुलिस को सूचना दी।


गुरप्रीत का बयान और पुलिस की जांच

गुरप्रीत ने पूछताछ में कहा, 'मैं अपने मन का राजा हूं।' उसने बताया कि शराब के प्रभाव में वह अपने कार्यों को अंजाम देता था। पुलिस ने बताया कि उसकी किसी भी मृतक से व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं थी।


पुलिस ने घटनाओं को जोड़ने में कठिनाई का सामना किया, लेकिन अंततः गुरप्रीत का अंत उसी पुलिस की गोली से हुआ, जिसे उसने छीनने की कोशिश की थी।