उत्तराखंड में मदरसों के लिए नए सख्त नियम लागू

उत्तराखंड में मदरसों के संचालन के लिए नए सख्त नियम लागू किए गए हैं। अल्पसंख्यक प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि बिना निर्धारित मानकों को पूरा किए मदरसों को धार्मिक शिक्षा देने की अनुमति नहीं होगी। इस निर्णय के बाद मदरसा संचालकों में हलचल बढ़ गई है। शिक्षा विभाग से नई मान्यता प्राप्त करने की आवश्यकता के साथ, सरकार का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। जानें इन नए नियमों के बारे में विस्तार से।
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उत्तराखंड में मदरसों के लिए नए सख्त नियम लागू

मदरसों के संचालन के लिए नए दिशा-निर्देश

उत्तराखंड में मदरसों के लिए नए सख्त नियम लागू

उत्तराखंड में मदरसों के संचालन के लिए नियमों को कड़ा किया गया है। अल्पसंख्यक प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि धारा-14 के तहत निर्धारित मानकों को पूरा किए बिना किसी भी मदरसे को धार्मिक शिक्षा देने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही, सभी मदरसों को शिक्षा विभाग से नई मान्यता प्राप्त करनी होगी। इस निर्णय के बाद प्रदेश भर में मदरसा संचालकों में हलचल बढ़ गई है।

शनिवार को अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी जेएस रावत ने मदरसा संचालकों की एक बैठक आयोजित की, जिसमें सभी को निर्धारित मानकों को पूरा करने के निर्देश दिए गए। बैठक में मौलाना इफ्तिखार, कारी शहजाद और मौलाना रिहान गनी सहित कई प्रतिनिधि उपस्थित थे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नियमों का पालन न करने वाले संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

वर्तमान में प्रदेश में 482 मान्यता प्राप्त मदरसे कार्यरत हैं, जिनमें 50,000 से अधिक छात्र-छात्राएं शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। देहरादून में 36 मदरसों को मान्यता मिली हुई है। मदरसा बोर्ड के निदेशक गिरधारी सिंह रावत ने देहरादून, हरिद्वार, उधम सिंह नगर, नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और चंपावत जिलों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितने मदरसे नए मानकों पर खरे उतरते हैं।

सरकार का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और व्यवस्थित बनाना है। खासकर वित्तीय लेनदेन, शिक्षकों की योग्यता और संस्थानों के संचालन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। अधिकारियों ने यह भी कहा कि धार्मिक शिक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मान्यता के लिए अनिवार्य शर्तें-
● शैक्षणिक संस्थान अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा स्थापित और संचालित होना चाहिए।
● संस्थान का शिक्षा परिषद से संबद्ध होना आवश्यक है।
● सोसायटी रजिस्ट्रार के पास संस्थान का पंजीकरण होना चाहिए।
● संस्थान की भूमि सोसायटी के नाम पर दर्ज होनी चाहिए।
● सभी वित्तीय लेनदेन संस्थान के आधिकारिक खाते से ही किए जाने चाहिए।
● संस्थान की सोसायटी के सभी सदस्य अल्पसंख्यक समुदाय से होने चाहिए।
● छात्रों और शिक्षकों को किसी धार्मिक गतिविधि में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
● केवल डिग्रीधारी शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी।
● शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय मामलों में परिषद और प्राधिकरण के निर्देश लागू होंगे।
● संस्थान ऐसा कोई कार्य नहीं करेगा जिससे सांप्रदायिक और सामाजिक सद्भाव प्रभावित हो।