उत्तर प्रदेश में सॉल्वर के जरिए नौकरी पाने वाले 50 लोगों का खुलासा

उत्तर प्रदेश में एक सॉल्वर गिरोह के माध्यम से सरकारी नौकरी पाने वाले 50 व्यक्तियों का खुलासा हुआ है। एसटीएफ की जांच में यह सामने आया है कि अभ्यर्थियों ने दिव्यांगता का प्रमाण पत्र बनवाकर सॉल्वर की मदद से परीक्षा उत्तीर्ण की। गिरोह के सरगना मनीष मिश्रा सहित 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में और भी लोगों के शामिल होने की संभावना है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और इसके पीछे की सच्चाई।
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उत्तर प्रदेश में सॉल्वर के जरिए नौकरी पाने वाले 50 लोगों का खुलासा

लखनऊ में सॉल्वर गिरोह का भंडाफोड़

उत्तर प्रदेश में सॉल्वर के जरिए नौकरी पाने वाले 50 लोगों का खुलासा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में एक सॉल्वर गिरोह के माध्यम से परीक्षा पास कर सरकारी नौकरी प्राप्त करने वाले 50 व्यक्तियों का खुलासा हुआ है। एसटीएफ की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। आरोप है कि अभ्यर्थियों ने दिव्यांगता का प्रमाण पत्र बनवाकर सॉल्वर की मदद से परीक्षा उत्तीर्ण की।

इन 50 लोगों के नामों का खुलासा होने के बाद उनकी नौकरियों पर संकट मंडराने लगा है। एसटीएफ और पुलिस अब इनसे पूछताछ करने की तैयारी कर रही है, और यह संभावना है कि फर्जीवाड़ा करने वालों की संख्या और भी बढ़ सकती है।

एसटीएफ ने 25 मार्च को इस गिरोह का पर्दाफाश करते हुए इसके सरगना मनीष मिश्रा सहित 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें तीन अभ्यर्थी और तीन सॉल्वर शामिल थे, जो सीबीएसई द्वारा आयोजित जूनियर क्लर्क भर्ती परीक्षा में शामिल हुए थे। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पहले अभ्यर्थियों के लिए दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाते थे और फिर उनकी जगह सॉल्वर को परीक्षा में बैठाते थे। सॉल्वर को एक परीक्षा के लिए 20 से 40 हजार रुपये का भुगतान किया जाता था।

सूत्रों के अनुसार, आरोपियों के पास से मिले इलेक्ट्रॉनिक डेटा और पूछताछ के दौरान लगभग 50 लोगों के नाम सामने आए हैं, जो वर्तमान में सरकारी नौकरी कर रहे हैं। ये सभी दिव्यांग कोटे से भर्ती हुए थे, और इनमें से अधिकांश बैंक के पदों पर चयनित हुए थे। जांच एजेंसी और पुलिस जल्द ही इन सभी को नोटिस भेजने की योजना बना रही है, और विभागीय अधिकारियों को भी सूचित किया जाएगा।

मनीष पिछले एक दशक से परीक्षाओं में धांधली कर रहा था, और उसके सॉल्वर लगभग हर शहर में मौजूद हैं। पुलिस अब उन सभी के बारे में जानकारी जुटा रही है, जिन्होंने परीक्षा दी और जिनका चयन हुआ। सबूत जुटाने के बाद इन सभी पर केस दर्ज किया जा सकता है। दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाने वालों की भूमिका इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण रही है।

सोशल मीडिया के माध्यम से मिली जानकारी के आधार पर झांसी के एक व्यक्ति ने मनीष के बारे में कुछ पोस्ट किए थे, जिसमें बताया गया था कि वह लोगों को परीक्षाओं में पास करवाकर नौकरी दिलवाता है। एसटीएफ ने इस सूचना के बाद जांच शुरू की, और सर्विलांस के जरिए मनीष के खिलाफ सबूत जुटाए, जिससे पूरा मामला उजागर हुआ।