ईरान पर हमले की तैयारी: ट्रंप के आदेश का इंतजार

अमेरिकी सेना ईरान पर हमले के लिए पूरी तरह तैयार है, और ट्रंप के अंतिम आदेश का इंतजार कर रही है। सेंटकॉम ने ट्रंप को ईरान पर हमले के लिए तीन विकल्प प्रस्तुत किए हैं, जिसमें सीमित हमले से लेकर सैन्य ठिकानों पर बड़े हमले तक शामिल हैं। ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि वे न्यूक्लियर हथियारों को अपने पास नहीं रख सकते। हालांकि, कांग्रेस से मंजूरी प्राप्त करना एक बड़ी बाधा बन गई है। ईरान ने भी अमेरिका को चेतावनी दी है कि वे फारस की खाड़ी में अमेरिकी जहाजों को डुबो देंगे।
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अमेरिका की सेना ईरान पर हमले के लिए तैयार

अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ हमले के लिए पूरी तरह से तैयार है। पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान पर हमले की योजना के बारे में जानकारी दी जा चुकी है, और अब वे अंतिम आदेश का इंतजार कर रहे हैं। यदि ट्रंप आदेश देते हैं, तो खाड़ी में एक नई जंग की शुरुआत हो सकती है। हाल ही में, जब ट्रंप वॉर रूम में पहुंचे, तो उन्हें सेंटकॉम द्वारा ईरान पर हमले की नई योजना के बारे में 45 मिनट की ब्रीफिंग दी गई। इस बैठक में रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और सेंटकॉम के कमांडर ब्रैड कूपर भी शामिल थे।


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ट्रंप को बताया गया कि पश्चिमी एशिया में सभी सैन्य बलों की तैनाती पूरी हो चुकी है। लड़ाकू विमानों की संख्या में वृद्धि की गई है, और तीनों सेनाओं को युद्ध की स्थिति में रखा गया है। जैसे ही ट्रंप अंतिम आदेश देंगे, ईरान पर हमले की कार्रवाई शुरू हो जाएगी। सेंटकॉम ने ट्रंप के सामने ईरान पर हमले के लिए तीन विकल्प प्रस्तुत किए।


ट्रंप के सामने रखे गए तीन विकल्प

ट्रंप को बताया गया कि अमेरिका ईरान पर सीमित हमले करके उसे कमजोर कर सकता है। पहले विकल्प के तहत होर्मुज स्ट्रेट पर कब्जा करने के लिए ग्राउंड ऑपरेशन किया जा सकता है। दूसरा विकल्प इस्फहान में घुसकर 60% संवर्धित यूरेनियम पर नियंत्रण करना है, और तीसरा विकल्प ईरानी सैन्य ठिकानों पर सबसे बड़ा हमला करना है।


इन तीन विकल्पों के अलावा, ईरान की तेल पाइपलाइन, रणनीतिक पुलों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमले की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। ट्रंप के बयान से यह स्पष्ट होगा कि उनका ध्यान किस विकल्प पर केंद्रित है।


ट्रंप की चेतावनी

ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान के पास न्यूक्लियर हथियार नहीं रहेंगे। उन्होंने कहा कि अमेरिका हर हाल में ईरान के परमाणु पदार्थों पर नियंत्रण करेगा। यदि ईरान ने अपने संवर्धित यूरेनियम को अमेरिका को नहीं सौंपा, तो अमेरिका उसे अपने कब्जे में ले लेगा।


IAEA के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने हाल ही में कहा था कि इस्फहान में ईरान के यूरेनियम दबे हुए हैं। पिछले वर्ष के हमले के बाद से IAEA को इस्फहान सेंटर से यूरेनियम हटाने के कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं।


कांग्रेस से मंजूरी की आवश्यकता

हालांकि ट्रंप ने ईरान में नए लक्ष्यों को निर्धारित कर लिया है, लेकिन अमेरिका में कांग्रेस से मंजूरी प्राप्त करना एक बड़ी बाधा बन गई है। व्हाइट हाउस इस मुद्दे पर कांग्रेस से अनुमति प्राप्त करने के लिए प्रयास कर रहा है।


युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि यदि कांग्रेस अनुमति देती है, तो ठीक है, अन्यथा बिना अनुमति के भी सेना कार्रवाई कर सकती है। सैन्य कार्रवाई के लिए कांग्रेस की मंजूरी की आवश्यकता नहीं है।


ईरान की प्रतिक्रिया

ईरान ने ट्रंप की धमकियों का जवाब देते हुए कहा है कि वे फारस की खाड़ी में अमेरिकी जहाजों को डुबो देंगे। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी जहाज उनकी रेंज में आए, तो उन्हें नष्ट कर दिया जाएगा।


इस स्थिति में, ईरान ने एक नए हथियार का भी जिक्र किया है, जिसके बारे में दुनिया को जानकारी नहीं है। ईरान के कमांडर ने कहा कि यह हथियार ट्रंप और नेतन्याहू को हृदयाघात दे सकता है।