ईरान ने अमेरिका के साथ शांति समझौते पर कड़ा रुख अपनाया

ईरान के स्पीकर मोहम्मद बाकर ग़ालिबफ़ ने अमेरिका के साथ संभावित शांति समझौते पर एक कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान तब तक किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेगा जब तक ईरानी जनता के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाती। ग़ालिबफ़ ने ईरान की सैन्य ताकत और मिसाइल क्षमताओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि कूटनीति का असली काम सैन्य जीतों को राजनीतिक लाभ में बदलना है। अमेरिका पर आंतरिक कलह पैदा करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि ईरानी जनता अपने अधिकारों के लिए दृढ़ संकल्पित है।
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तेहरान में ईरानी स्पीकर का बयान

तेहरान: ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर ग़ालिबफ़ ने रविवार को अमेरिका के साथ संभावित शांति समझौते पर एक स्पष्ट और कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि ईरान, पश्चिम एशिया के संकट को सुलझाने के नाम पर अमेरिका के साथ किसी भी ऐसे समझौते को स्वीकार नहीं करेगा, जिसमें ईरानी जनता के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित न की गई हो।


ईरान ने अमेरिका के साथ शांति समझौते पर कड़ा रुख अपनाया
“जब तक हमारे लोगों के अधिकार सुरक्षित नहीं होते, समझौता मंजूर नहीं”, अमेरिकी शांति प्रस्ताव पर बोले ईरानी स्पीकर…


ईरानी सरकारी मीडिया, ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग’ (IRIB) के अनुसार, स्पीकर ने स्पष्ट किया कि तेहरान अपनी सैन्य सफलताओं को राजनीतिक और कानूनी लाभ में बदलने की योजना बना रहा है।


सैन्य ताकत और कूटनीति

“मिसाइलों की कामयाबी कूटनीति का आधार, दुश्मनों के वादों पर भरोसा नहीं”


ग़ालिबफ़ ने संसद के नए सदस्यों के ऑनलाइन शपथ ग्रहण समारोह में ईरान की सैन्य ताकत और मिसाइल क्षमताओं की प्रशंसा की। उन्होंने कहा:


“सैन्य क्षेत्र में जो कुछ भी हासिल हुआ है, वह ईरानी जनता के अटूट समर्थन का परिणाम है। अब कूटनीति का असली काम इन सैन्य जीतों को राजनीतिक और कानूनी सफलताओं में बदलना है। हमारे सैनिकों को दुश्मन की चिकनी बातों पर भरोसा नहीं करना चाहिए।”


ग़ालिबफ़ ने यह भी कहा कि ईरान के लिए बातचीत का एकमात्र मानदंड यह है कि समझौते के बदले में देश को क्या ठोस लाभ मिल रहा है। उन्होंने दोहराया कि जब तक ईरानी लोगों के अधिकार सुरक्षित नहीं होते, तब तक किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं होंगे।


अमेरिका की नीतियों पर कड़ी प्रतिक्रिया

“ईरान को झुकाने की अमेरिकी कोशिशें महज एक झूठा सपना”


ग़ालिबफ़ ने अमेरिका और उसके सहयोगियों पर ईरान में आंतरिक कलह पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपनी सैन्य विफलताओं को छिपाने के लिए एक नए युद्ध का सहारा ले रहा है, जिसमें आर्थिक दबाव और मीडिया प्रोपेगैंडा शामिल हैं।


“दुश्मन अपनी हार की भरपाई करने के लिए हमें आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर करना चाहता है। लेकिन ईरानी जनता उस दुश्मन का विरोध करने के लिए संकल्पित है जो ईरान और इस्लाम के अस्तित्व को मिटाने पर तुला हुआ है।”


इस वर्चुअल शपथ ग्रहण समारोह में 201 सांसदों ने भाग लिया, जिनमें से 187 ऑनलाइन जुड़े और 14 व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे। यह स्पष्ट है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान झुकने के मूड में नहीं है।