ईरान और इजराइल के बीच संघर्ष: ट्रंप की मध्यस्थता से बनी शांति संधि
ईरान की योजना
रविवार को ईरान इजराइल पर हमले की तैयारी में था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप की अंतिम क्षणों में की गई मध्यस्थता और तात्कालिक कूटनीति ने तेहरान को इस स्थिति से वापस खींच लिया और एक नाजुक सीजफायर समझौता पूरा करने में मदद की।
ट्रंप की मध्यस्थता
ट्रंप का हस्तक्षेप
ट्रंप ने ईरान को रोकने के लिए मध्यस्थों के माध्यम से आग्रह किया। यह हस्तक्षेप और अमेरिकी प्रस्तावों की रिपोर्ट ने तेहरान के भीतर संतुलन को बदल दिया। ईरान ने तब कदम पीछे खींच लिया जब ट्रंप ने दक्षिण लेबनान से इजराइल की वापसी और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी समुद्री नाकेबंदी को तुरंत समाप्त करने का प्रस्ताव दिया। यह एक महत्वपूर्ण रियायत थी, जिसने ईरानी नेताओं को बिना किसी मिसाइल दागे एक ठोस लाभ दिखाने का अवसर दिया।
एक दिन जो बिखरने वाला था
एक दिन जो बिखरने वाला था
रविवार की घटनाओं की श्रृंखला ने अंततः समझौते को अनिवार्य नहीं बनाया। जब इजराइल ने बेरुत पर हमला किया, तो ट्रंप ने अपनी निराशा व्यक्त की और कहा कि नेतन्याहू ने कोई विवेक नहीं दिखाया। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने का आग्रह किया, यह चेतावनी देते हुए कि क्षेत्र एक शांति समझौते के करीब है।
समझौते की वास्तविकता
समझौते की वास्तविकता
ट्रंप ने रविवार को समझौते की घोषणा की, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने का आदेश दिया। उन्होंने ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी समुद्री नाकेबंदी को तुरंत हटाने का आदेश दिया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया पर बताया कि एक औपचारिक हस्ताक्षर समारोह 19 जून को स्विट्जरलैंड में होगा।
आगे की चुनौतियाँ
आगे की चुनौतियाँ
सीजफायर एक महत्वपूर्ण क्षण है, लेकिन यह गहरे और अनसुलझे मतभेदों को छुपाता है। ईरान का परमाणु कार्यक्रम सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है, जिसमें दोनों पक्षों ने अभी तक कोई लचीलापन नहीं दिखाया है। दोनों देशों ने 60-दिन की अवधि के दौरान परमाणु मुद्दे और संभावित प्रतिबंधों में राहत पर विस्तृत वार्ता करने का वचन दिया है।
