अमेरिका ने भारत को लौटाईं 657 प्राचीन कलाकृतियां, कीमत 133 करोड़
भारत को मिली प्राचीन धरोहरें
कोहिनूर हीरे की चर्चा के बीच, अमेरिका ने भारत को 657 प्राचीन कलाकृतियां वापस लौटा दी हैं। इन कलाकृतियों की कुल अनुमानित कीमत 133 करोड़ रुपये है। ये धरोहरें तस्करी और चोरी के माध्यम से अमेरिका पहुंची थीं, जिन्हें अब सद्भावना के तहत लौटाया गया है। इस संबंध में सरकारी सूत्रों ने मीडिया को जानकारी दी है। मैनहट्टन जिला अटॉर्नी कार्यालय ने एक समारोह में इन कलाकृतियों को भारत को सौंपा।
इन कलाकृतियों को वाणिज्य दूतावास की सहायता से भारत लाया जाएगा। भारतीय महा वाणिज्यदूत बिनय प्रधान ने अमेरिकी अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया है।
प्राचीन कलाकृतियों का अमेरिका पहुंचने का तरीका
ये प्राचीन कलाकृतियां अमेरिका कैसे पहुंचीं?
अमेरिकी अधिकारियों ने 2020 में नैन्सी वीनर को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद पता चला कि वह सुभाश कपूर के साथ मिलकर एक गिरोह चला रही थीं। यह गिरोह भारत से प्राचीन मूर्तियों की चोरी कर उन्हें अमेरिका में बेचने का काम करता था।
1. गिरोह पहले यह तय करता था कि कहां से कलाकृतियों को चुराना है, इसके लिए रेकी की जाती थी।
2. इसके बाद बिचौलिए को नियुक्त किया जाता था, जिसका काम मंदिरों या पुरातात्विक स्थलों से मूर्तियों को चुराना होता था।
3. चोरी की गई कलाकृतियों को तस्करी नेटवर्क के माध्यम से अमेरिका भेजा जाता था, जहां उन्हें बेचा जाता था।
जो कलाकृतियां वापस की गई हैं, उनमें लाल बलुआ पत्थर से बनी बुद्ध की प्रतिमा शामिल है, जिसमें अभय मुद्रा दर्शाई गई है। इसके अलावा, मध्य प्रदेश के एक मंदिर से 2000 में लूटी गई नृत्य करते गणेश की बलुआ पत्थर की प्रतिमा भी शामिल है।
अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका ने नवंबर में इन कलाकृतियों को लौटाने की प्रक्रिया शुरू की थी। 2025 में अमेरिका ने इस निर्णय की घोषणा की थी।
कोहिनूर हीरे की वापसी पर चर्चा
कोहिनूर को लौटाने की चर्चा क्या है?
ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स तृतीय के अमेरिका दौरे के दौरान, न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने कोहिनूर हीरे की वापसी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यदि राजा उनसे मिलते हैं, तो वह उनसे अनुरोध करेंगे कि भारत का कोहिनूर हीरा लौटाया जाए।
ममदानी के इस बयान ने यूरोप, अमेरिका और एशिया में काफी चर्चा पैदा की है।
