अमेरिका की डीलों को ठुकरा रहे घाना और जिम्बाब्वे
अमेरिका की विदेश नीति और छोटे देशों की प्रतिक्रिया
अमेरिका की विदेश नीति हमेशा अपने लाभ के लिए काम करती है। इसी संदर्भ में, अमेरिका ने घाना और जिम्बाब्वे जैसे छोटे देशों को अपनी डील के जरिए प्रभावित करने की कोशिश की है। लेकिन इन दोनों देशों ने अमेरिका की रणनीतियों को समझते हुए, एक के बाद एक डील को अस्वीकार कर दिया है। हाल ही में, जिम्बाब्वे ने फरवरी में और घाना ने अभी हाल में डील करने से मना किया है।
घाना ने अमेरिका की स्वास्थ्य डील को ठुकरा दिया है। अमेरिका ने घाना से संवेदनशील स्वास्थ्य डेटा की मांग की थी, जिसके बदले में वह फंडिंग देने का प्रस्ताव रख रहा था। लेकिन घाना ने अपने नागरिकों के स्वास्थ्य डेटा को साझा करने से इनकार कर दिया। एक अधिकारी ने बताया कि घाना ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित स्वास्थ्य डील को उन शर्तों पर अस्वीकार कर दिया है, जिनसे अमेरिकी संस्थाओं को बिना उचित सुरक्षा उपायों के देश के संवेदनशील स्वास्थ्य डेटा तक पहुंच मिल जाती।
डाटा की मांग और घाना की स्थिति
घाना के डेटा प्रोटेक्शन कमीशन के कार्यकारी निदेशक अर्नोल्ड कवरपुओ ने कहा कि मांगी गई डेटा एक्सेस की सीमा उस उद्देश्य के लिए आवश्यक से कहीं अधिक थी, जिसके लिए इसे बताया गया था। इस बयान पर अमेरिका की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। अमेरिका की ये डील्स उन देशों को सहायता प्रदान करने के लिए हैं, जो अमेरिकी सहायता कटौती से प्रभावित हैं, ताकि वे अपने सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत कर सकें।
अमेरिका ने लगभग दो दर्जन अफ्रीकी देशों के साथ स्वास्थ्य डील की हैं, जो ट्रंप प्रशासन के अमेरिका फर्स्ट दृष्टिकोण के तहत हैं। घाना के अनुसार, डेटा के उपयोग के लिए पहले से कोई मंजूरी नहीं ली गई थी। प्रस्तावित समझौते के तहत, घाना को पांच वर्षों में लगभग 109 मिलियन अमेरिकी डॉलर की फंडिंग मिलनी थी।
जिम्बाब्वे की स्थिति
फरवरी में, जिम्बाब्वे के अधिकारियों ने स्वास्थ्य डेटा की निष्पक्षता और संप्रभुता से संबंधित मुद्दों के कारण प्रस्तावित डील को अस्वीकार कर दिया। इसके अलावा, जाम्बिया ने भी डील के एक हिस्से पर रोक लगा दी है, हालांकि वहां अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
