पाकिस्तान के न्यायिक प्रणाली में बड़ा घोटाला: न्यायाधीश की नियुक्ति अवैध घोषित
पाकिस्तान की न्यायिक प्रणाली में एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसमें एक न्यायाधीश की नियुक्ति को अवैध घोषित किया गया है। इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने तारेक मेहबूब जहांगिरी की शैक्षणिक योग्यताओं को धोखाधड़ी से भरा पाया। जानें कैसे उन्होंने फर्जी नामांकन संख्या का उपयोग कर परीक्षा दी और किस प्रकार उनकी डिग्री को अमान्य करार दिया गया। यह मामला न्यायिक प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।
| Feb 25, 2026, 14:21 IST
पाकिस्तान में न्यायिक घोटाले का खुलासा
पाकिस्तान की न्यायिक प्रणाली को हिला देने वाले एक घोटाले में, इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने सोमवार को एक विस्तृत 116-पृष्ठीय निर्णय जारी किया, जिसमें न्यायाधीश तारेक मेहबूब जहांगिरी की नियुक्ति को “कानूनी प्राधिकरण के बिना” बताया गया। अदालत ने कहा कि उनके पास वैध कानून की डिग्री नहीं थी। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश सरदार मुहम्मद सरफराज डोगर और न्यायमूर्ति मुहम्मद आजम खान की एक डिवीजन बेंच ने यह निर्णय लिया कि पूर्व न्यायाधीश जहांगिरी की मूल कानून की डिग्री शून्य थी, जिससे उनकी उच्च न्यायालय में पदोन्नति “कानूनी शून्यता” बन गई। कराची विश्वविद्यालय (KU) के रजिस्ट्रार द्वारा प्रस्तुत रिकॉर्ड के अनुसार, उनकी शैक्षणिक योग्यताएँ "धोखाधड़ी, पहचान की चोरी और अनुशासनात्मक प्रतिबंध को दरकिनार करने के प्रयास" से प्रभावित थीं।
