26/11 की अनसुनी नायिका: नर्स अंजलि कुल्थे की वीरता
26/11 के हमलों की अनकही कहानी
जब भी मुंबई में 26/11 के आतंकवादी हमलों का जिक्र होता है, ताज होटल, नरीमन हाउस और छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर हुई तबाही की भयावहता याद आती है। लेकिन उस रात कुछ ऐसी घटनाएं भी हुईं, जो कैमरों से दूर असाधारण साहस की मिसाल बनीं।
नर्स अंजलि कुल्थे की कहानी ऐसी ही एक अद्भुत वीरता की मिसाल है। उन्होंने कामा अस्पताल में घुस आए लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों के सामने 20 गर्भवती महिलाओं की जान बचाई। अब, 16 साल बाद, उनकी यह बहादुरी फिल्म 'भारत भाग्य विधाता' के माध्यम से दर्शकों के सामने आएगी, जिसमें कंगना रनौत अंजलि का किरदार निभा रही हैं.
अंजलि कुल्थे का परिचय
कुल्थे उस दिन कामा अस्पताल में ड्यूटी पर थीं, जब उन्हें पता चला कि CST पर हमला करने वाले आतंकवादी अस्पताल की ओर बढ़ रहे हैं। एक सामान्य दिन की ड्यूटी अचानक जीवन और मृत्यु की लड़ाई में बदल गई।
एक पुराने इंटरव्यू में, कुल्थे ने बताया कि उन्होंने गोलियों की आवाज़ सुनी और देखा कि आतंकवादी सुरक्षाकर्मियों को गोली मारते हुए अस्पताल में घुस रहे हैं। उन्हें तुरंत एहसास हुआ कि उन्हें अपने मरीजों की सुरक्षा करनी है।
महिलाओं की जान बचाने की प्रक्रिया
कुल्थे ने भागने के बजाय 20 गर्भवती महिलाओं को इकट्ठा किया और उन्हें एक छोटी सी पैंट्री में ले गईं। उन्होंने लाइटें बंद कर दीं और मोबाइल फोन साइलेंट कर दिए ताकि बाहर की आवाजें सुनाई न दें।
हालांकि, खतरा यहीं खत्म नहीं हुआ। एक महिला, जो उच्च रक्तचाप से पीड़ित थी, को लेबर पेन शुरू हो गया। कुल्थे ने साहस दिखाते हुए उसे लेबर रूम तक पहुँचाया, जबकि गोलियाँ चल रही थीं।
कुल्थे की बहादुरी का महत्व
अगली सुबह, उस महिला ने एक बच्ची को सुरक्षित जन्म दिया। कुल्थे ने बताया कि बच्ची का नाम 'गोली' रखा गया, ताकि उस रात की याद बनी रहे।
फिल्म 'भारत भाग्य विधाता' उन आम भारतीयों के साहस को दर्शाती है जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में हिम्मत दिखाई। यह फिल्म 26/11 के हमलों के एक अनदेखे पहलू को उजागर करेगी।
हाल ही में तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण के बाद इन हमलों पर चर्चा फिर से शुरू हुई है। यह फिल्म उन फ्रंटलाइन वर्कर्स को भी सम्मानित करती है जिन्होंने दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली।
फिल्म की रिलीज़
फिल्म 'भारत भाग्य विधाता' 12 जून को रिलीज़ होने वाली है।
