वैश्विक व्यापार पर पश्चिम एशिया के तनाव का प्रभाव

पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का वैश्विक व्यापार पर गहरा असर पड़ रहा है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद, महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग बंद हो गया है, जिससे कंपनियों को नए और महंगे मार्गों की तलाश करनी पड़ रही है। एमएससी जैसी बड़ी शिपिंग कंपनियों ने अपने व्यापार मॉडल में बदलाव किया है, जिससे माल ढुलाई महंगी हो गई है। जानें इस संकट के कारण और इसके प्रभावों के बारे में विस्तार से।
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पश्चिम एशिया में तनाव और व्यापार पर प्रभाव

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक व्यापार पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद, एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग बंद हो गया है। इस स्थिति के कारण, दुनिया की सबसे बड़ी कंटेनर शिपिंग कंपनी, एमएससी को अपने व्यापार मॉडल में बदलाव करना पड़ा है। कंपनी ने जोखिम भरे होर्मुज जलडमरूमध्य के बजाय सऊदी अरब के जमीनी मार्गों पर ट्रकों के माध्यम से माल ढुलाई का निर्णय लिया है। यह बदलाव सप्लाई चेन को धीमा कर देगा, जिससे माल ढुलाई महंगी होगी और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.


समुद्री व्यापार में बदलाव और ट्रकों का उपयोग

10 मई से बेल्जियम के एंटवर्प शहर से एक नई लॉजिस्टिक्स सेवा शुरू होने जा रही है। इस नए मार्ग के तहत, बड़े मालवाहक जहाज यूरोप से निकलकर स्वेज नहर होते हुए लाल सागर पहुंचेंगे। लेकिन, ये जहाज आगे की यात्रा नहीं करेंगे और सऊदी अरब के जेद्दाह और किंग अब्दुल्ला बंदरगाहों पर अपना सारा माल उतार देंगे। यहां से कंटेनरों की समुद्री यात्रा समाप्त होगी और सड़क यात्रा शुरू होगी.


1300 किलोमीटर की यात्रा

सऊदी अरब के पश्चिमी तट पर माल उतारने के बाद, ट्रकों का एक बड़ा बेड़ा इसे राजधानी रियाद होते हुए पूर्वी तट पर स्थित दम्माम तक ले जाएगा। यह यात्रा लगभग 1300 किलोमीटर लंबी होगी। दम्माम पहुंचने के बाद, सामान को फिर से छोटे मालवाहक जहाजों में लादकर अबू धाबी और दुबई के जेबेल अली जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। इसके अलावा, ये छोटे जहाज बहरीन, इराक और कुवैत भी जाएंगे। सड़क के रास्ते इतनी लंबी दूरी तय करने में अधिक समय लगेगा, जिससे परिवहन लागत में वृद्धि होगी और कार्बन उत्सर्जन भी बढ़ेगा.


क्यों उत्पन्न हुए ये कठिन हालात?

इस व्यापारिक संकट की जड़ 28 फरवरी की घटना है, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया था। इसके बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर कड़ी पाबंदियां लग गई हैं। यह समुद्री मार्ग विश्व व्यापार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। दुबई और अबू धाबी के औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाली कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां इसी मार्ग पर निर्भर थीं। फिलहाल, इसके जल्द खुलने की कोई संभावना नहीं है, जिससे कंपनियों को वैकल्पिक और महंगे मार्गों की तलाश करनी पड़ रही है.


शिपिंग उद्योग में नए मार्गों की खोज

केवल एमएससी ही नहीं, बल्कि अन्य लॉजिस्टिक्स कंपनियों ने भी इस संकट का सामना करने के लिए कदम उठाए हैं। हैम्बर्ग की कंपनी हापागलॉयड और कोपेनहेगन स्थित मार्सक ने भी इसी तरह के 'लैंडब्रिज' या मल्टीमोडल जमीनी मार्गों की घोषणा की है। ये कंपनियां ओमान और सऊदी अरब के रास्ते माल की आवाजाही कर रही हैं। इसके परिणामस्वरूप, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात के पूर्वी तटों पर माल की भारी भीड़ जमा हो गई है और वहां ट्रकों की मांग बढ़ गई है। यह स्थिति दर्शाती है कि वैश्विक व्यापार अब अनिश्चितता के एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है.