विवाह के लिए शुभ दिशा: नवविवाहित जोड़ों के कमरे का सही स्थान
भारतीय विवाह की आध्यात्मिकता
भारतीय संस्कृति में विवाह केवल एक सामाजिक या शारीरिक बंधन नहीं है, बल्कि इसे एक गहन आध्यात्मिक साधना के रूप में देखा जाता है। विवाह संस्कार को सोलह संस्कारों में से एक माना जाता है। इसे सात जन्मों का बंधन माना जाता है, इसलिए नवविवाहित जोड़ों के जीवन में प्रेम का होना अत्यंत आवश्यक है। हालांकि, कभी-कभी वैवाहिक जीवन के आरंभिक चरणों में कुछ समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। वास्तु शास्त्र में दिशाओं का विशेष महत्व है। यदि हम सही दिशा में कार्य करते हैं, तो इसके सफल होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
नवविवाहित दंपती के कमरे के लिए अवांछित दिशाएं
नवविवाहित जोड़ों का कमरा उत्तर, दक्षिण, उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पूर्व दिशा में नहीं होना चाहिए। इन दिशाओं में कमरे के होने से वैवाहिक जीवन में छोटी-छोटी बातों पर झगड़े हो सकते हैं और बहसें बढ़ सकती हैं। इसलिए, बेहतर होगा कि आप इन दिशाओं में नए जोड़े का कमरा न बनाएं। यदि आपने पहले से ही ऐसा कमरा बना लिया है, तो उन्हें कुछ समय के लिए वहां से दूर रखना उचित होगा।
शुभ दिशा में नवविवाहित दंपत्ति का कमरा
वास्तु के अनुसार, नवविवाहित दंपत्ति का कमरा उत्तर-पश्चिम दिशा में होना चाहिए। यह दिशा उनके वैवाहिक जीवन में प्रेम को बढ़ावा देती है और जीवन की अन्य समस्याओं का समाधान भी मिलकर निकालने में मदद करती है।
महत्वपूर्ण बातें ध्यान में रखें:
- नवविवाहित दंपत्ति का बिस्तर लोहे का नहीं होना चाहिए।
- लकड़ी का चौकोर बिस्तर नवविवाहितों के लिए शुभ माना जाता है।
- बिस्तर के अंदर धातु का सामान, उपहार या बर्तन नहीं रखने चाहिए।
- कमरे का रंग हमेशा हल्का होना चाहिए ताकि शांति बनी रहे।
- कमरे की पूर्व दीवार पर दंपत्ति अपनी शादी की तस्वीरें लगा सकते हैं।
- सोते समय नवविवाहित जोड़े का सिर दक्षिण या पश्चिम की ओर होना चाहिए।
- इन बातों का ध्यान रखने से नवविवाहित जोड़ों के वैवाहिक जीवन की कई समस्याएं समाप्त हो जाती हैं।
