ट्रंप ने न्यूक्लियर कोड की मांग की? सीआईए के पूर्व अधिकारी का बड़ा खुलासा
सीआईए के पूर्व अधिकारी का दावा
ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के बीच, सीआईए के पूर्व अधिकारी लैरी जॉनसन ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। उनके अनुसार, व्हाइट हाउस में एक सिचुएशन रूम की बैठक के दौरान, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूक्लियर कोड तक पहुंचने की कोशिश की थी, लेकिन जनरल डैन केन ने उन्हें रोक दिया। इसके परिणामस्वरूप, दोनों के बीच तनाव बढ़ गया और ट्रंप को बैठक से बाहर भेज दिया गया। हालांकि, व्हाइट हाउस ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है।
दुनिया में चर्चा के दो प्रमुख सवाल
जॉनसन के इस बयान ने वैश्विक स्तर पर दो महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। पहला, ट्रंप न्यूक्लियर कोड तक पहुंचने की कोशिश क्यों कर रहे थे? दूसरा, अमेरिका में न्यूक्लियर कोड की जानकारी किसके पास है?
ट्रंप को न्यूक्लियर कोड की आवश्यकता क्यों थी?
यह घटना उस समय की बताई जा रही है जब अमेरिका के दो वायुसेना कर्मी ईरान में फंसे हुए थे। उस समय अमेरिका ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा था, और संभवतः ट्रंप ने इसी कारण न्यूक्लियर कोड के बारे में जानकारी मांगी। हालांकि, बैठक में शामिल किसी भी वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात की पुष्टि नहीं की है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने इस बैठक के बारे में एक रिपोर्ट दो दिन पहले प्रकाशित की थी, जिसमें कहा गया था कि ट्रंप बैठक के दौरान काफी चिंतित थे और उन्हें वहां से हटा दिया गया। रिपोर्ट में न्यूक्लियर कोड का कोई उल्लेख नहीं है।
अमेरिका में परमाणु नियंत्रण किसके पास है?
2024 में, पेंटागन ने अमेरिकी कांग्रेस को एक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें कहा गया था कि राष्ट्रपति, जो कि सेना के प्रमुख कमांडर हैं, को परमाणु हथियारों के उपयोग का अंतिम निर्णय लेने का अधिकार है। यह कानून 1948 में बनाया गया था, लेकिन इसे गुप्त रखा गया है।
आउटराइडर मैगजीन के अनुसार, परमाणु हथियारों के संचालन की जिम्मेदारी राष्ट्रीय सैन्य कमान केंद्र (NMCC) के पास है। यह केंद्र सभी ऑपरेशनों को अंजाम देने के लिए जिम्मेदार है, लेकिन आदेश केवल राष्ट्रपति ही दे सकते हैं। राष्ट्रपति इस निर्णय के लिए अपनी टीम से सलाह लेते हैं, जिसमें उप राष्ट्रपति, रक्षा मंत्री, सेना प्रमुख और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शामिल होते हैं।
न्यूक्लियर कोड की सुरक्षा
न्यूक्लियर कोड एक विशेष बैग में होता है, जिसे न्यूक्लियर फुटबॉल कहा जाता है। इस बैग में एक बिस्किट जैसा सामान होता है, जिस पर कोड अंकित होता है। यह बैग हमेशा पेंटागन के एक अधिकारी के पास होता है, जो राष्ट्रपति के साथ रहता है। इस अधिकारी के बारे में अधिक जानकारी नहीं दी जाती है।
इस बैग में एक ब्लू बुक भी होती है, जिसके माध्यम से न्यूक्लियर कोड तक पहुंचा जा सकता है। शीत युद्ध के दौरान इस कोड को लेकर दो बार चेतावनी जारी की गई थी।
न्यूक्लियर कोड के माध्यम से हमले की प्रक्रिया
इस कोड को सबसे पहले राष्ट्रीय सैन्य कमान केंद्र को भेजा जाता है। सेंट्रल कमान के लिए कम से कम दो बार कोड का मिलान करना आवश्यक है। यह प्रक्रिया केवल 7 मिनट में पूरी करनी होती है, यानी अमेरिकी राष्ट्रपति को 7 मिनट के भीतर यह तय करना होता है कि परमाणु हथियारों का उपयोग किया जाए या नहीं।
पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने इस समय सीमा की आलोचना की थी, यह कहते हुए कि इतने महत्वपूर्ण निर्णय के लिए अधिक समय की आवश्यकता है। पूर्व राष्ट्रपति बुश ने भी इस समय सीमा पर सवाल उठाए थे।
क्या राष्ट्रपति के निर्णय को चुनौती दी जा सकती है?
वाशिंगटन में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज के परमाणु अप्रसार विभाग के पूर्व विशेषज्ञ मार्क फिट्जपैट्रिक ने 2017 में एक लेख में बताया था कि राष्ट्रपति के निर्णय को चुनौती दी जा सकती है। इसके लिए उप राष्ट्रपति को संविधान के अनुच्छेद 25 का उपयोग करना होगा, जो बताता है कि यदि राष्ट्रपति कार्य करने में असमर्थ हैं, तो उन्हें पद से हटा सकते हैं। इसके लिए सीनेट और कांग्रेस के दो तिहाई सदस्यों की आवश्यकता होती है।
