ट्रंप के ग्रीनलैंड पर बयान से बढ़ी अंतरराष्ट्रीय राजनीति की हलचल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड को लेकर हालिया बयानों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। व्हाइट हाउस ने इसे अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकता बताया है, जबकि डेनमार्क ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। यूरोप के कई देशों ने डेनमार्क के समर्थन में एकजुटता दिखाई है। जानें इस मुद्दे की गंभीरता और वैश्विक प्रतिक्रिया के बारे में।
| Jan 7, 2026, 21:55 IST
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नया मोड़
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड को लेकर हालिया टिप्पणियों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। प्रारंभ में इसे एक कूटनीतिक बयान समझा गया, लेकिन व्हाइट हाउस की आधिकारिक प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा गंभीर रणनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ग्रीनलैंड को अमेरिका के अधीन लाने के लिए “कई विकल्पों” पर विचार कर रहा है, जिसमें सैन्य विकल्प भी शामिल हैं।
व्हाइट हाउस की स्थिति
व्हाइट हाउस ने बीबीसी को बताया है कि ग्रीनलैंड का अधिग्रहण अमेरिका के लिए “राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकता” है। ग्रीनलैंड, जो डेनमार्क का एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है, नाटो का सदस्य भी है। ऐसे में किसी भी सैन्य कार्रवाई को नाटो की मूल भावना के खिलाफ माना जा सकता है। ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि अमेरिका को सुरक्षा कारणों से ग्रीनलैंड की आवश्यकता है, जिस पर डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।
सैन्य विकल्प पर चर्चा
व्हाइट हाउस के बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति और उनकी टीम इस विदेशी नीति लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विभिन्न रास्तों पर विचार कर रही है। हालांकि, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड पर हमले की कोई योजना नहीं है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने डेनमार्क से ग्रीनलैंड खरीदने के विकल्प का उल्लेख किया है।
दीर्घकालिक संबंधों की योजना
अमेरिकी विदेश विभाग ने यह भी कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड के लोगों के साथ दीर्घकालिक और लाभकारी व्यावसायिक संबंध स्थापित करना चाहता है। विभाग का कहना है कि आर्कटिक क्षेत्र में साझा प्रतिद्वंद्वियों की गतिविधियां बढ़ रही हैं, जो अमेरिका, डेनमार्क और नाटो सहयोगियों के लिए चिंता का विषय हैं।
यूरोप का समर्थन
इस बीच, यूरोप के कई देशों ने डेनमार्क के समर्थन में एकजुटता दिखाई है। ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड, स्पेन और डेनमार्क के नेताओं ने संयुक्त बयान में कहा कि ग्रीनलैंड उसके लोगों का है और उसके भविष्य का निर्णय केवल डेनमार्क और ग्रीनलैंड ही कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आर्कटिक सुरक्षा को नाटो सहयोगियों के माध्यम से सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
ग्रीनलैंड की स्थिति
ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नील्सन ने इस बयान का स्वागत करते हुए सम्मानजनक संवाद की अपील की है। उनका कहना है कि ग्रीनलैंड की स्थिति अंतरराष्ट्रीय कानून और क्षेत्रीय अखंडता के सिद्धांतों पर आधारित है।
स्थानीय समुदाय की चिंताएं
ग्रीनलैंड की आबादी लगभग 57 हजार है और 1979 से वहां व्यापक स्वशासन लागू है, हालांकि रक्षा और विदेश नीति अब भी डेनमार्क के नियंत्रण में है। अधिकांश ग्रीनलैंडवासी भविष्य में डेनमार्क से स्वतंत्रता चाहते हैं, लेकिन अमेरिका का हिस्सा बनने के विचार का व्यापक विरोध है। मार्च 2025 में करीब एक हजार लोगों ने ट्रंप के बयानों के खिलाफ प्रदर्शन किया था।
विश्लेषकों की राय
विश्लेषकों का मानना है कि रूस और चीन की बढ़ती दिलचस्पी, दुर्लभ खनिज संसाधन और बर्फ पिघलने से नए समुद्री रास्तों का खुलना ग्रीनलैंड को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना रहा है। इसी पृष्ठभूमि में ट्रंप प्रशासन का रुख सामने आया है, जो अमेरिका-यूरोप संबंधों और नाटो की एकता की परीक्षा बन सकता है।
