निर्जला एकादशी 2026: तिथियों में कन्फ्यूजन और व्रत का महत्व

निर्जला एकादशी, जिसे भीमसेन एकादशी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है। इस साल, तिथियों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है, जिससे लोग यह समझ नहीं पा रहे हैं कि यह व्रत कब मनाया जाएगा। पुरुषोत्तम महीने के कारण इस साल दो एकादशी बढ़ गई हैं। जानें इस व्रत का महत्व और सही तिथियाँ।
 | 
निर्जला एकादशी 2026: तिथियों में कन्फ्यूजन और व्रत का महत्व gyanhigyan

निर्जला एकादशी का महत्व

निर्जला एकादशी 2026: तिथियों में कन्फ्यूजन और व्रत का महत्व


हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है, जिसमें निर्जला एकादशी या भीमसेन एकादशी को साल की सबसे महत्वपूर्ण एकादशी माना जाता है। इस दिन व्रत रखने से 24 एकादशी व्रतों का पुण्य प्राप्त होता है। इसलिए, लोग इंटरनेट पर निर्जला एकादशी की तारीख को लेकर काफी खोज कर रहे हैं।


क्यों है इस साल कन्फ्यूजन?

आमतौर पर एकादशी की तारीख को लेकर भ्रम होता है, जो कि विभिन्न पंचांगों की अलग-अलग तिथियों के कारण होता है। लेकिन इस साल कन्फ्यूजन एक महीने तक फैला हुआ है। लोग यह समझ नहीं पा रहे हैं कि ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी, जो निर्जला एकादशी के रूप में जानी जाती है, मई में है या जून में। इसका कारण पुरुषोत्‍तम महीना है।


पुरुषोत्‍तम महीने का प्रभाव

ज्येष्ठ महीने की शुरुआत 2 मई 2026 से हुई थी, और इस महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी 27 मई को पड़ती है। लेकिन इस साल पुरुषोत्‍तम महीने के कारण दो एकादशी बढ़ गई हैं - पद्मिनी एकादशी और परम एकादशी। इसलिए, ज्येष्ठ मास की निर्जला एकादशी अब 25 जून 2026 को मनाई जाएगी।


पद्मिनी और परम एकादशी

ज्येष्ठ अधिकमास की पहली एकादशी, पद्मिनी एकादशी, 27 मई 2026 को मनाई जाएगी। इसके बाद, परम एकादशी का व्रत 11 जून 2026 को रखा जाएगा।


पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 26 मई को सुबह 5:10 बजे शुरू होगी और 27 मई को सुबह 6:21 बजे समाप्त होगी। इस प्रकार, पद्मिनी एकादशी का व्रत 27 मई, बुधवार को रखा जाएगा। व्रत का पारण समय 28 मई को सुबह 5:25 से 7:56 बजे तक होगा.