अधिकमास में मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 2026: पूजा विधि और महत्व

इस लेख में अधिकमास की मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 2026 के बारे में जानकारी दी गई है। जानें कब है यह पर्व, इसकी पूजा विधि और इसके महत्व के बारे में। भक्तों के लिए यह अवसर भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
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अधिकमास में मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 2026: पूजा विधि और महत्व gyanhigyan

अधिकमास कृष्ण जन्माष्टमी 2026

हर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है, जिसे मासिक कृष्ण जन्माष्टमी कहा जाता है। इस वर्ष अधिकमास की मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत 08 जून 2026, सोमवार को आयोजित किया जाएगा।


जून में मासिक कृष्ण जन्माष्टमी की तिथि

पंचांग के अनुसार, इस साल अधिकमास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 8 जून 2026 को सुबह 3:24 बजे से शुरू होगी और अगले दिन 9 जून 2026 को सुबह 3:23 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार, 8 जून 2026, सोमवार को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी मनाना शुभ माना जाता है।


मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ पीले कपड़े पहनें। घर के मंदिर में एक चौकी रखें और उस पर लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाएं।


चौकी पर भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा स्थापित करें। हाथ में जल, फूल, तुलसी का पत्ता या मिठाई लेकर व्रत का संकल्प लें। कृष्ण जी की प्रतिमा का पंचामृत से अभिषेक करें और उन्हें नए वस्त्र पहनाकर श्रृंगार करें।


फिर कृष्ण जी को पीले फल, फूल, मिठाई और चंदन अर्पित करें। घी का दीपक जलाते हुए मंत्र जाप करें और आरती करके पूजा का समापन करें। रात 12 बजे के बाद या अगले दिन सूर्योदय के बाद पूजा-पाठ करने के बाद व्रत खोलें।


मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन को श्री कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इसके अलावा, हर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भी कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है।


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्री कृष्ण के जन्म की याद और अपने प्रभु से जुड़े रहने के लिए मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन पूजा करने से भक्त हर महीने अपनी भक्ति से कृष्ण की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।


श्री कृष्ण के शक्तिशाली मंत्र

ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने।


प्रणत: क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नम:॥


महामंत्र (हरे कृष्ण मंत्र): हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।