मौसमी चटर्जी: शादी के बाद भी चमकता करियर

मौसमी चटर्जी ने शादी के बाद भी अपने करियर को बनाए रखा, जो कि मनोरंजन जगत में एक अनोखी बात है। उन्होंने कम उम्र में विवाह किया और फिर भी अभिनय में वापसी की। उनकी कहानी न केवल उनके करियर की सफलता को दर्शाती है, बल्कि परिवार के प्रति उनकी प्राथमिकता और व्यक्तिगत संघर्षों को भी उजागर करती है। जानें उनके जीवन के महत्वपूर्ण मोड़ और दुखद घटनाओं के बारे में।
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शादी के बाद भी करियर में बनी रहीं

मनोरंजन उद्योग में अक्सर यह कहा जाता है कि शादी करने के बाद एक्ट्रेस का करियर खत्म हो जाता है। हालांकि, हाल के वर्षों में यह धारणा काफी हद तक बदल गई है। 70, 80 और 90 के दशक में, शादी के बाद अभिनेत्रियों के लिए फिल्म इंडस्ट्री में बने रहना मुश्किल था। कई अभिनेत्रियों ने शादी के बाद अपने करियर को खो दिया। लेकिन मौसमी चटर्जी एक ऐसी अभिनेत्री हैं, जिन्होंने शादी के बाद ही फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा।


कम उम्र में विवाह

मौसमी चटर्जी ने 10वीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान सिंगर हेमंत कुमार के बेटे जयंत मुखर्जी से सगाई की थी, और 15 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई। शादी के दो साल बाद, 17 साल की उम्र में वह मां बनीं। मौसमी अक्सर अपनी शादी के बारे में बात करती हैं और बताती हैं कि उनकी शादी जल्दी हुई थी क्योंकि उनकी बड़ी बुआ उन्हें दुल्हन बनते देखना चाहती थीं।


अभिनय में कदम

मौसमी चटर्जी ने तरुण मजूमदार की बंगाली फिल्म 'बालिका वधू' में चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में काम किया। इसके बाद उन्हें कई फिल्में ऑफर की गईं, लेकिन पढ़ाई के कारण उन्होंने अभिनय से दूरी बना ली। शादी के बाद, उनके पति और ससुर का समर्थन मिलने पर उन्होंने 1972 में शक्ति सामंत की फिल्म 'अनुराग' से वापसी की। इस फिल्म में उन्होंने एक अंधी लड़की का किरदार निभाया, जिसने उन्हें दर्शकों का दिल जीतने में मदद की।


दुखद घटना

मौसमी चटर्जी ने अपने करियर में कई सफल फिल्में दीं, लेकिन परिवार को हमेशा प्राथमिकता दी। उनके दो बेटियां हैं, लेकिन 2019 में उनकी बेटी पायल सिन्हा का निधन हो गया। पायल 45 साल की थीं और लंबे समय से जुवेनाइल डायबिटीज से पीड़ित थीं। मौसमी ने अपनी बेटी के पति और ससुरालवालों पर लापरवाही का आरोप लगाया।