बॉलीवुड की विवादित फिल्म 'गर्लफ्रेंड': समलैंगिकता पर एक असफल प्रयास
फिल्म 'गर्लफ्रेंड' का विवादास्पद सफर
हाल के वर्षों में बॉलीवुड ने समलैंगिकता (LGBTQ+) जैसे संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर फिल्में बनाना शुरू किया है, लेकिन दो दशक पहले की स्थिति बिल्कुल अलग थी। 2004 में एक फिल्म आई थी, जिसने अपने अनोखे विषय के कारण देशभर में विवाद खड़ा कर दिया।
यह फिल्म थी निर्देशक करण राजदान की 'गर्लफ्रेंड', जिसमें ईशा कोप्पिकर, अमृता अरोड़ा और आशीष चौधरी ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। इसे अपने समय की सबसे विवादास्पद फिल्मों में से एक माना जाता है।
फिल्म की कहानी तान्या (ईशा कोप्पिकर) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी कॉलेज की सहेली सपना (अमृता अरोड़ा) के प्रति गहरा और एकतरफा प्रेम रखती है। कहानी में तब मोड़ आता है जब सपना की जिंदगी में राहुल (आशीष चौधरी) की एंट्री होती है और सपना उससे प्यार कर बैठती है।
जब फिल्म का प्रचार शुरू हुआ, तो इसे बॉलीवुड की पहली लेस्बियन-थीम वाली फिल्म के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस कारण दर्शकों और मीडिया में इसे लेकर काफी उत्सुकता थी। लेकिन जब यह सिनेमाघरों में रिलीज हुई, तो समीक्षकों और दर्शकों को निराशा हाथ लगी।
विशेषज्ञों का मानना था कि फिल्म ने संवेदनशील मुद्दे को उठाने के बजाय, केवल सनसनी फैलाने और अश्लील दृश्यों को ठूंसने का काम किया।
फिल्म की रिलीज के बाद देशभर में इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने इसे भारतीय संस्कृति के खिलाफ बताया और इसके प्रदर्शन का विरोध किया।
कुछ सालों बाद, जब अमृता अरोड़ा ने 'कॉफी विद करण' शो में भाग लिया, तो उन्होंने इस फिल्म को लेकर अपने पछतावे का इजहार किया। जब करण जौहर ने उनसे पूछा कि क्या उन्हें इस फिल्म में काम करके खुशी मिली, तो उन्होंने कहा, 'बिलकुल नहीं।'
अमृता ने बताया कि उन्होंने इस फिल्म को साइन करने का निर्णय क्यों लिया और बाद में उनका क्या अनुभव रहा। उन्होंने कहा, 'जब मैंने पहली बार स्क्रिप्ट पढ़ी, तो मुझे लगा कि यह एक प्रगतिशील कदम है। लेकिन जब मैंने फिल्म देखी, तो मुझे एहसास हुआ कि यह अश्लीलता से भरी हुई थी।'
अमृता ने अपने माता-पिता की प्रतिक्रिया को याद करते हुए कहा कि फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग के दौरान जब अश्लील दृश्य आए, तो उनका परिवार थिएटर से बाहर चला गया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें लेस्बियन थीम से कोई समस्या नहीं थी, बल्कि आपत्ति इस बात से थी कि मेकर्स ने गंभीर विषय को सस्ते मनोरंजन के लिए इस्तेमाल किया।
बॉक्स ऑफिस पर फिल्म का प्रदर्शन भी निराशाजनक रहा, और इसके कुल कलेक्शन का आंकड़ा महज 6 करोड़ रुपये के आसपास ही रहा।
