बिहार में चार साल बाद लापता बच्चे की कहानी: अपहरण और ममता का जटिल मामला
बिहार में बच्चों के अपहरण की चौंकाने वाली घटना
बिहार के औरंगाबाद जिले में हाल ही में एक बच्चे के अपहरण की घटना ने सबका ध्यान खींचा है। 16 मई को वट सावित्री पूजा के दिन, एक मंदिर से लापता हुए बच्चे की खोज में जुटी पुलिस ने एक अन्य बच्चे को भी बरामद किया, जिसे उसी दिन अगवा किया गया था। चार साल पहले चोरी हुए शिवम को उसके माता-पिता को सौंप दिया गया है, लेकिन इस मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। अपहरण करने वाली महिला की सच्चाई ने पुलिस और समाज को भावुक कर दिया है। शिवम, जो चार साल से उस महिला को अपनी मां मानता था, असल में उसकी असली मां नहीं निकली। जब पुलिस ने उसे उसके असली माता-पिता से मिलवाया, तो वह उन्हें पहचान नहीं सका। इस खुलासे ने अपहरण, ममता और मजबूरी की एक संवेदनशील कहानी को उजागर किया है.
मंदिर से चार साल पहले लापता हुआ बच्चा
यह मामला ओबरा देवी मंदिर से जुड़ा है, जहां 2022 में चार वर्षीय शिवा पांडे अचानक गायब हो गया था। उसके परिवार ने उसकी खोज में काफी प्रयास किए, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। घटना के बाद परिवार टूट गया था और पुलिस ने भी उसकी तलाश की, लेकिन शिवम का कोई पता नहीं चला। हाल ही में, गया पुलिस को सूचना मिली कि खिजरसराय क्षेत्र में एक महिला के पास संदिग्ध परिस्थितियों में एक बच्चा रह रहा है। पुलिस ने छापेमारी की और वहां से शिवा पांडे को बरामद किया।
बच्चा अपहर्ता महिला को मां मानता रहा
सबसे भावुक पल तब आया जब पुलिस ने बच्चे को उसके असली माता-पिता से मिलवाया। चार साल तक जिस महिला की गोद में वह बड़ा हुआ, उसे वह अपनी असली मां समझता रहा। पुलिस के अनुसार, बच्चे ने शुरुआत में अपने असली माता-पिता को पहचानने से इनकार कर दिया और उस महिला के पास लौटने की जिद कर रहा था। परिवार की खुशी के साथ-साथ यह दर्द भी था कि उनका बेटा उन्हें भूल चुका है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बच्चे की काउंसिलिंग की जा रही है ताकि वह धीरे-धीरे अपने परिवार से जुड़ सके।
अपहरण की कहानी और जांच
महिला ने पुलिस को बताया कि उसकी शादी के कई साल बाद भी संतान नहीं हुई थी, जिसके कारण उसके पति ने दूसरी शादी कर ली थी। इससे वह मानसिक रूप से टूट गई थी। उसने बताया कि बच्चे की चाह में वह मंदिरों और भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाती थी। 2022 में ओबरा देवी मंदिर में उसकी नजर शिवा पर पड़ी और उसने उसे अगवा कर लिया। महिला ने बच्चे को अपने बेटे की तरह पाला और किसी को शक नहीं होने दिया।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या महिला अकेली इस वारदात में शामिल थी या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क भी काम कर रहा था। फिलहाल, बच्चे को उसके असली परिवार के पास लौटा दिया गया है और आरोपी महिला से पूछताछ जारी है। यह घटना कानून व्यवस्था पर सवाल उठाती है और ममता और अपराध के बीच की पतली रेखा को भी उजागर करती है।
